देश के आजाद होने से पहले 1877 में खोला गया जयपुर चिडिय़ाघर के प्रति अब पर्यटकों का आकर्षण कम होने लगा है। वजह है यहां पर वन्यजीवों की कमी जो यहां आने वाले पर्यटकों को अखरती है। हालांकि यहां पक्षियों की 26 से अधिक प्रजातियां देखने को मिलती हैं लेकिन टाइगर, लेपर्ड सहित अन्य वन्यजीवों को देखने की चाह में आने वाले पर्यटकों को जब पता चलता है कि यहां उन्हें केवल पक्षी और कुछ हिरण ही देखने को मिलेंगे तो वह निराश हो जाते हैं।
वन्यजीव देखने बायो पार्क पड़ता है जाना
एक समय था जबकि जयपुर जू पक्षियों के साथ वन्यजीवों से भी आबाद हुआ करता था। रामनिवास बाग में दो भागों में विभक्त जयपुर जू के एक भाग में वन्यजीव तो दूसरा केवल परिंदों के लिए ही था। उस समय प्रतिदिन चार से पांच हजार पर्यटक यहां आया करते थे। पर्यटकों को टाइगर, लेपर्ड, भालू, बंदर, बारहसिंगा सहित कई अन्य वन्यजीव यहां देखने को मिलते थे, लेकिन 4 मई 2016 को जयपुर जू से वन्यजीवों को नाहरगढ़ बायो पार्क में शिफ्ट कर दिया गया और यहां चंद हिरण आदि को छोडकऱ केवल पक्षी ही रह गए। ऐसे में अब यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ रही है। अब वन्यजीव देखने के लिए पर्यटकों को नाहरगढ़ बायो पार्क का रुख करना पड़ता है।
अधिकांश पिंजरे खाली
जयपुर चिडिय़ाघर में वर्तमान में अधिकांश पिंजरे खाली पड़े हैं।देखने में आता है कि यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक वहीं हैं जो पहली बार जयपुर घूमने आए हैं या फिर चिडिय़ाघर में पहली बार आए हैं। यहां आने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि यहां वन्यजीव देखने को नहीं मिलेंगे तो वह निराश हो जाते हैं खासतौर पर छोटे बच्चे। बड़ी संख्या में पक्षियों के होने के बाद भी यहां वन्यजीवों की कमी पर्यटकों को कहीं ना कहीं खलती है। पर्यटकों का कहना है कि यदि यहां वन्यजीव भी होते तो और अच्छा रहता। खासतौर पर छोटे बच्चों को शेर, भालू, बंदर आदि की कमी महसूस होती है।
50 ग्राम से150 किलो तक के पक्षी
आपको बता दें कि जयपुर जू में 50 ग्राम से लेकर 150 किलो तक के पक्षी रहवास कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यहां 26 से अधिक प्रजातियों के तकरीबन 350 से भी अधिक पक्षी पर्यटकों को देखने को मिलते हैं। इसमें शुतुरमुर्ग, पेलिकन, गोल्डन पीजेंट, फ्लेमिंगो,लव बड्र्स, एलेक्जेंड्रा पैरेट, डक आदि शामिल हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को विभिन्न प्रकार की पक्षियों की चहचहाट लोगों को सुकून का अहसास करवाती है।
मैं यहां काफी सालों पहले जयपुर चिडिय़ाघर में आया था, तब यहां काफी कुछ देखने को मिलता था कई प्रकार के वन्यजीव देखने को मिलते थे लेकिन अब यहां आकर निराशा हो रही है। मैं अपनी पत्नी के साथ आया था, हालांकि टिकट की कीमत अधिक नहीं थी लेकिन जो थी उसके मुताबिक भी यहां कुछ देखने को नहीं मिल रहा।
भगवान सहाय शर्मा, पर्यटक
एक समय था जबकि मैं जयपुर हर साल आता था, जब भी आया जयपुर जू जरूर आता था, लेकिन अब काफी सालों के बाद आना हुआ हैद्वअब तो मेरे भी बच्चे हो गए, उन्हें जयपुर जू दिखाने आया था लेकिन ना केवल मेरे बच्चे बल्कि मैं खुद भी बेहद निराश हूं। जू बिल्कुल खाली सा
हो गया है। बेहतर होता कि यहां के पक्षियों को शिफ्ट करके इसे बंद कर दिया जाए, या फिर यहां नए जानवरों को लाया जाए।
मोहम्मद इमरान, पर्यटक
इनका कहना है,
यह सही है जयपुर चिडिय़ाघर में वन्यजीवों नहीं हैं क्योंकि उन्हें सालों पहले बायो पार्क शिफ्ट कर दिया गया लेकिन चिडिय़ाघर का मतलब ही है कि परिंदों का घर जो यहां बहुतायत में हैं। इस समय यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं हालांकि पहले की तुलना में जरूर संख्या कुछ कम हुई है।
डॉ. अशोक तंवर, पशु चिकित्सक,
जयपुर जू।