सविता व्यास. जयपुर
Teachers Day 2025: जयपुर की कच्ची बस्तियों में एक ‘वर्दी वाली गुरु’ शिक्षा का ऐसा दीप जला रही है, जो न केवल बच्चों को अक्षरों से रूबरू करा रहा है, बल्कि उनके जीवन को नई दिशा दे रहा है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडिशनल एसपी) सीमा हिंगोनिया की मोहल्ला पाठशाला कच्ची बस्तियों के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है। यहां न भव्य इमारतें हैं, न संसाधनों की भरमार, लेकिन गुरु की निष्ठा और बच्चों की लगन ने 25 बच्चों से शुरू हुई इस पहल को 500 बच्चों तक पहुंचा दिया है। शिक्षिका से पुलिस अधिकारी बनी सीमा का यह प्रयास साबित करता है कि सच्चा गुरु वही है, जो बच्चों को सही राह दिखाए।
शिक्षा से अपराध की राह से बचाव
सेंटर फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीकर सेक्शन (सीईडब्ल्यूएस) की संरक्षक और बीकानेर में तैनात सीमा हिंगोनिया बताती हैं कि कच्ची बस्तियों में पलने वाले बच्चे अक्सर हालात के चलते अपराध की ओर धकेल दिए जाते हैं। पुलिस सेवा के दौरान ऐसे कई मामले देखने के बाद उन्होंने ठाना कि शिक्षा ही इन बच्चों को अंधेरी राह से बचा सकती है। यही सोच मोहल्ला पाठशाला की नींव बनी। आज यहां बच्चे न केवल पढ़ना-लिखना सीख रहे हैं, बल्कि सपनों को नई उड़ान दे रहे हैं।
आठ शहरों में निःशुल्क पाठशालाएं
राजस्थान के आठ स्थानों पर सीईडब्ल्यूएस निःशुल्क सायंकालीन पाठशालाएं संचालित कर रही है, जिनमें जयपुर (मदरामपुरा और झालाना कच्ची बस्ती), जोधपुर (दो पाठशालाएं), निवाई (टोंक), अजमेर, रींगस (सीकर), और खैरथल (तिजारा) शामिल हैं। इन पाठशालाओं में शिक्षक बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जीवन जीने की कला, नैतिकता, साफ-सफाई, आर्ट-क्राफ्ट, इंग्लिश स्पीकिंग, खेलकूद, भारतीय संस्कार और संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा दे रहे हैं।
ड्यूटी के साथ जुनून का संगम
पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के बावजूद सीमा ऑनलाइन और व्हाट्सएप के जरिए पाठशालाओं की निगरानी करती हैं। छुट्टियों में बच्चों के बीच पहुंचकर क्लास लेती हैं और उन्हें गाइड करती हैं। सीमा का प्रोजेक्ट ‘सेव यूथ, सेव नेशन’ इन पाठशालाओं के साथ-साथ अन्य स्कूलों में भी चल रहा है। यहां बच्चों को बेसिक शिक्षा के साथ-साथ कानूनी जागरूकता और उनके अधिकार-कर्तव्यों की जानकारी दी जाती है। सीमा का सपना है कि राजस्थान की हर कच्ची बस्ती में निःशुल्क सायंकालीन पाठशालाएं स्थापित हों, जहां बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें।