त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत गौवंश में भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के तहत पशुपालकों और दुग्ध उत्पादक संघों को आ रही समस्याओं के निदान के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की बैठक का आयोजन बुधवार को गोपालन विभाग में किया गया । बैठक की अध्यक्षता करते हुए गोपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. लाल सिंह ने कहा कि भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से राज्य में उच्च नस्लीय गौवंश जैसे गिर, साहीवाल, मुर्रा विकसित होने के साथ पशुपालकों को आर्थिक और सामाजिक सम्बल मिल सकेगा। इस मौके पर डॉ.सिंह ने योजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए मौजूद दुग्ध उत्पादक संघों के प्रतिनिधियों के साथ वार्तालाप की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत प्रति गर्भ धारण पर 21000 रुपए कार्यकारी संस्था को भुगतान करने होते हैं। जिसमें 5000 रुपए केंद्र सरकार द्वारा अनुदान देय है, और 16000 रुपए पशुपालक द्वारा दिए जाने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राज्य के ज्यादातर पशुपालकों के लिए उक्त राशि अधिक है जिसकी वजह से डेयरी संघों के माध्यम से राशि का आहरण किया जा रहा है। इसी क्रम में जयपुर डेयरी द्वारा 14000 रुपए की राशि का अनुदान दिया जा रहा है जिसके तहत पशुपालक को सिर्फ 2000 रुपए की राशि ही देनी होती है।साथ ही यदि पशुपालक/ गौशाला उक्त राशि भुगतान करने में असमर्थ हो तो सनराइज़ संस्था द्वारा उक्त राशि का भुगतान किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के प्रतिनिधि डॉ. एसपी सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से योजना के प्रभावी संचालन के विभिन्न तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने पशुपालकों से अपील करते हुए कहा कि भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक का संचालन किया जा रहा है।
बैठक में वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों सहित राज्य के विभिन्न जिलों से दुग्ध उत्पादक संघों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।