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…तो अब मिल सकेगा शुद्ध शहद
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…तो अब मिल सकेगा शुद्ध शहद

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जयपुर

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Lalit Mohan Sharma

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Updated: 24 Aug 2018, 12:23 PM IST

शहद में मिलावट पर रोक लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इसकी गुणवत्ता के नए मानकों को अधिसूचित किया है। इससे शहद उत्पादक किसानों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत हासिल करने में मदद मिलेगी। भारत के राजपत्र में अधिसूचित नए मानकों के लागू होने से शहद में ‘कॉर्न सीरप’, ‘राइस सीरप’ और ‘इंवर्टेड सीरप’ (गन्ने के सीरे से तैयार होने वाला सीरप) की मिलावट पर प्रभावी रोक लगेगी। ऐसे सीरप के मिलाने से शहद जमता नहीं है।
वर्ष 1955 से अब तक लागू मानकों के तहत शहद में जैव प्रौद्योगिकी की मदद से ऐसे तत्वों को मिलाया जा सकता था और शहद से मिलते जुलते दिखने के कारण इनका आसानी पता नहीं चलता था। लेकिन नए अधिसूचित मानकों के तहत अब ऐसी मिलावट नहीं की सकती।
राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य देवव्रत शर्मा के अनुसार नई अधिसूचना से शहद उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा जो वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के प्रयासों के अनुरूप है और इससे मधुमक्खीपालक किसानों को काफी लाभ होगा।
उन्होंने कहा कि नए मानदंडों की घोषणा करके सरकार ने मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के अपने वायदे को पूरा किया है। इससे शहद में मिलावट करने वालों पर प्रभावी रोक लगेगी।
शहद के लिए जो नए मानदंड बने हैं उनमें शहद में आर्द्रता की मात्रा की सीमा को, जो पहले 25 प्रतिशत थी, घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है।