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लिंगदोह कमेटी की धज्जियां उड़ा रहे छात्रनेता, शहर की गुलाबी दीवारों को किया बदरंग

चुनाव तिथि घोषित होने के साथ ही टिकट के जुगाड़ में लगे नेता

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जयपुर
राजस्थान विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनावों का कार्यक्रम घोषित हो चुका है। इसी को लेकर अब राजस्थान विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रनेताओं ने प्रचार प्रसार करना भी शुरू कर दिया है। जिसके चलते लिंगदोह कमेटी के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। नेताओं के प्रचार प्रसार के कारण जयपुर शहर पोस्टर और बैनर से अट गया है। जिस कारण से शहर को स्मार्ट सिटी और सुंदर बनाने के लिए चलाए गए निगम के अभियान का भी छात्रनेताओं पर कोई असर नहीं है। शहर की गुलाबी दीवारों को छात्र नेताओं ने अपने-अपने प्रचार के लिए पोस्टर्स लगाकर बदरंग कर दिया है। गौरतलब है कि छात्रसंघ चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केन्द्र सरकार ने पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी जे एम लिंगदोह की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जिसके अनुसार उम्मीदवार पर आपराधिक मामला दर्ज होने पर और चुनावी खर्च सीमा 5 हजारसे ज्यादा खर्च करने पर उस उम्मीदवार का नामांकन रदद किया जा सकता है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय और कॉलेज परिसर में छात्रनेता रंगीन पोस्टर बैनर पम्पलेट नहीं लगा सकते हैं। लेकिन लगातार हो रहे एबीवीपी और एनएसयूआई के शक्ति प्रदर्शनों में यह सब नियम टूटते नजर आ रहे है। जयपुर शहर व विश्वविद्यालय कैंपस को नेताओं ने रंगीन पोस्टर और बैनर से अट दिया है जिससे शहर बदरंग नजर आ रहा है।
रैलियों से जेएलएन रोड व शहर जाम
विश्वविद्यालय में चुनाव की तिथि घोषित होने के साथ ही शक्ति प्रदर्शन रैलियों का दौर भी शुरू हो गया है। सोमवार को एबीवीपी ने शक्ति प्रदर्शन किया। जिसके बाद आज एनएसयूआई शक्ति प्रदर्शन कर रही है। शक्ति प्रदर्शन रैलियों के चलते नेताओं के वाहन काफिलों से शहर के मुख्य मार्गों पर जाम लग रहा है। वहीं शहर में जगह जगह से रैलियों में वाहनों के काफिले से जेएलएन रोड पर भी जाम लग रहा हैं।
विश्वविद्यालय नहीं कर पाता नामांकन रदद
नगर निगम और पुलिस प्रशासन शहर व विश्वविद्यालय को बदरंग करने वाले एक दर्जन से अधिक नेताओं पर एफआईआर दर्ज करवा चुका है। लेकिन राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं करवाया है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार छात्रनेता पर मुकदमा दर्ज होने पर उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। लेकिन विश्वविद्यालय ने गत आठ साल में तो किसी भी नेता की उम्मीदवारी को रदद नहीं किया है। दरअसल संपति विरूपण अधिनियम 2006 के कानून के तहत पुलिस पोस्टर बैनर लगाने वाले छात्रनेताओं पर मुकदमा तो दर्ज कर लेती है लेकिन यह अपराध एक जमानती अपराध है। जिसमें पुलिस को जमानत लेने का अधिकार है। इस कारण गिरफतारी नहीं हो पाती है।
एक बार तो सूना हो गया था कैंपस
छात्रसंघ चुनावों की तिथि की घोषणा नहीं होने से और अवकाश आने के कारण सोमवार से पहले राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों का माहौल फीका सा दिखने लगा है। चुनाव की तिथि की घोषणा नहीं होने से छात्रनेताओं का चुनावी अभियान भी कमजोर हो गया जिस कारण से कैपंस सूना सूना सा नजर आने लगा है। छात्रसंघ चुनावों के इंतजार में नेताओं का जोश भी कमजोर हो गया है जिस कारण से कॉलेज और विश्वविद्यालय में छात्रनेताओं का प्रचार प्रसार ना के बराबर नजर आने लगा हैं। लेकिन अब चुनावों की तिथि घोषित होने पर नेता और उनके समर्थक फिर से प्रचार प्रसार में जुट गए है।
टिकट के जुगाड़ में लगे नेता
राजस्थान विश्वविद्यालय में एबीवीपी और एनएसयूआई मुख्य रूप से दो छात्र संगठन अपने प्रत्याशियों को मैदान में उतारता है। दोनो ही संगठनों की ओर से करीब तीन तीन दावेदार अध्यक्ष पद पर टिकट के लिए दावेदारी जता रहे है। इसके साथ ही अन्य तीन पदों पर भी संगठन की ओर से टिकट दी जाएगी। जिस कारण से चुनावों में दावेदारी जता रहे छात्रनेता पार्टी के शीर्ष पदाधिकारियों,शीर्ष नेताओं से समय लेकर मिल रहे है और टिकट लेने का जुगाड़ बैठाने में लगे है।