छोटू, ये नाम आपने भी सुना होगा। चाय की थड़ियों पर…रेस्तरां में टेबल व बर्तन साफ करते हुए…या कुछ ने कारखानों में। इस छोटू की जिन्दगी सालों से ऐसी ही है, कुछ नहीं बदला। एक छोटू घुट कर सांसे तोड़ देता है, तो दूसरा घुटने के लिए तैयार हो जाता है। खासकर जयपुर में बाल श्रम की गतिविधियां इस तेजी से बढ़ रही हैं, जिसने न सिर्फ बचपन को कैद किया, बल्कि सांसे भी छीन ली। जयपुर, जोधपुर जैसे बड़े शहरों श्रमिकों के खूब ग्राहक हैं। चंद रुपयों के बदले दलाल इन बच्चों को बिहार और बंगाल से राजस्थान लाते हैं, पढ़ाने और काम सिखाने का वादा कर दलाल को बेच देते हैं। तीन साल के दौरान पुलिस ने 1532 रेड की है। उनमें 1883 लड़के और 96 लड़कियां मुक्त कराई गई हैं। इनमें से करीब सोलह सौ बच्चे पड़ोसी राज्यों के हैं।
यातनाएं ऐसी, सुनते ही सहम जाएं
बंधक बाल श्रमिक विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। जयपुर में आमेर, ब्रहृमपुरी और भट्टा बस्ती समेत कई जगहों पर रेड में सामने आया कि बच्चों को यातनाएं दी जा रही है। शास्त्री नगर से तो एक बच्चे के घुटने तोड़ दिए गए और तलवे जला दिए गए थे। उसका मालिक उसके साथ गंदा काम करता था सो अलग। 16 घंटे काम करने के बाद मालिक को भी बच्चा खुश करता था। वहीं ब्रह्मपुरी में एक जगह पर रेड करने के दौरान तो बच्चों को अलमारी और टांड से छुड़ाया गया था। उनके गद्दों के नीचे छुपा दिया गया था।
बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
शहर में बाल श्रमिकों को इतनी क्रूरता से काम करवाया जा रहा है, कि मौत तक होना शुरू हो गई है। दो साल के दौरान सिर्फ जयपुर शहर में ही लगभग 8 मौतें हो चुकी हैं। हाल ही में जालूपुरा में रहने वाले 16 साल के लड़के की दमघोंटू कमरे में काम करने से मौत हो गई। बीमार होने के बावजूद बच्चों को दवा नहीं मिलती।
इनका कहना है
मानव तस्करी यूनिट चूड़़ी कारखाने सहित अन्य जगहों पर कार्रवाई करती है। हम इस पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। किसी तरह की सूचना आने के बाद तत्काल कार्रवाई की जाती है।
डीसीपी नॉर्थ परिस देशमुख
हमारी टीम पुलिस के साथ मिलकर काम करती है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में पहली बार कोर्ट ने अवैध तरीके से जयपुर लाए गए बच्चों को 50— 50 हजार रुपए देने का भी ऐलान किया है।
देशराज, कोऑर्डिनेटर, बचपन बचाओ टीम