
जोधपुर।
डकैती के मामले में जोधपुर जेल में बंद दो बंदियों ने आपसी रंजिश के चलते एक बस संचालक की बसें जलाने के लिए आठ माह पूर्व एक अन्य बंदी से चालीस हजार रुपए में मोबाइल खरीदा था। दोनों बंदी आठ महीने से मोबाइल उपयोग में ले रहे थे और उसी की मदद से 40 हजार रुपए में दो युवकों को बसें जलाने का ठेका दिया था। सूरसागर थाना पुलिस की रिमाण्ड के दौरान दोनों बंदियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ।
थानाधिकारी गौतम डोटासरा ने बताया कि गत 19 अप्रेल की सुबह पांच बजे कबीर नगर में पेट्रोल पम्प के पास खड़ी विक्रमसिंह की बस जला दी गई थी। इस मामले में बाड़मेर जिले के गिराब थानान्तर्गत असाड़ी निवासी महिपालसिंह, महामंदिर में नाथजी का झालरा निवासी ईशान उर्फ हर्षवर्धन, आसोप के पास मूंदियाड़ निवासी जितेन्द्रसिंह व एक बाल अपचारी को पकड़ा गया। तीनों ने पूछताछ में जेल में बंद गिंगाला निवासी शैतानसिंह व भूपेन्द्रसिंह के लिए बस जलाना कबूल किया। तीनों के मोबाइल की कॉल डिटेल में एक नम्बर पर लगातार बात होने का पता लगा। जो जेल में बंद शैतानसिंह व भूपेन्द्रसिंह काम ले रहे थे। इसकी लोकेशन भी जेल के आस-पास आई थी।
तब डकैती के आरोपी शैतानसिंह व भूपेन्द्रसिंह को जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया। तीन दिन के रिमाण्ड के दौरान इन्होंने जेल में बंद विरम उर्फ भाणू से आठ माह पहले चालीस हजार रुपए में मोबाइल खरीदने की जानकारी दी। विरम की जेल में मृत्यु होना भी बताया। इस संबंध में जेल से जानकारी मांगी गई है।
रंजिश में बदला लेने के लिए जलाईं थी बसें
शैतानसिंह व भूपेन्द्र की मोबाइल पर भाखरी निवासी जितेन्द्रसिंह से बात होती थी। जो दोनों के लिए रुपए की व्यवस्था करता था। आपसी रंजिश के चलते दोनों बंदियों ने बसें जलाने की साजिश रची थी। इस काम में जितेन्द्र रुपए भेजने को तैयार हुआ था। बसें जलाने के बाद उसी ने जलती बस की फोटो व वीडियो जेल में दोनों बंदियों के मोबाइल पर भेजे थे। जितेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया। शैतान व भूपेन्द्र को भी न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया गया।
एसटीडी खाते से जुड़े मोबाइल नम्बर की सूचना मांगी
जेल में बंदियों को एसटीडी से परिजन व वकील से बात करने की सुविधा है। एसटीडी खाते से चयनित नम्बर पर ही बात की जा सकती है। पुलिस ने शैतान व भूपेन्द्रसिंह के एसटीडी खाते से जुड़े मोबाइल नम्बर की जानकारी मांगी है।