खरगोन.
माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा गुरुवार को हाईस्कूल और हायर सेकंडरी के नतीजे घोषित किए। इस पूरे प्रदेश में 12 वीं का रिजल्ट अपेक्षाकृत कम निकला। परीक्षा में असफल विद्यार्थी और उनके पालकों में काफी निराशा का माहौल है। वहीं खरगोन जिले के भीकनगांव तहसील में शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल अहिरखेड़ा में भी 49 बच्चे फस्र्ट डिवीजन में पास हुए है। यह मप्र का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है, जहां पिछले 11 सालों में कोई भी बच्चा फेल नहीं हुआ है और ना ही किसी को पूरक मिली है। जी हां, स्कूल में पढ़ाई का बेहतर माहौल और टीचरों की मेहनत से यह मुकाम मिला है। जहां बच्चों की डिसनरी में में ‘फेल’ शब्द ही नहीं है। संस्था प्राचार्य सुरेन्द्र सिंह पंवार ने बताया कि इस साल 10 वीं के 42 में से 37 प्रथम एवं पांच द्वितीय श्रेणी में पास हुए। जबकि कक्षा 12 वीं के सभी 49 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण । पिछले 11 सालों से हायर सेकंडरी में स्कूल के सभी बच्चे फस्र्ट डिविजन में पास होते आ रहे हैं। यह करिश्मा प्रदेश की सरकारी स्कूल में अभी तक सुनने को नहीं मिला। स्कूल के 33 विद्यार्थी 75 प्रतिशत से अधिक नंबर लाकर लैपटॉप की पात्रता हासिल की।
11 सालों से कीर्तिमान
बोर्ड परीक्षा में जहां रिजल्ट को लेकर कुछ स्कूलों का परफार्मेंस खराब रहा है, तो वहीं अहिरखेड़ा के विद्यार्थियों ने नया कीर्तिमान रचा है। इस स्कूल में 10 वीं और 12 वीं का रिजल्ट सौ प्रतिशत रहा। स्कूल में पास बच्चों की सफलता का पूरी गारंटी है। 11 सालों से स्कूल का रिजल्ट 100 प्रतिशत आ रहा है। इसी स्कूल की छात्रा छाया नायक ने 10 वीं में जिले की मेरिट सूची में दूसरा स्थान प्राप्त किया। गुरुवार को सफलता का जश्न स्कूल में शिक्षकों ने बच्चों को मिठाई खिलाते हुए मनाया।
स्मार्ट क्लास, सीसीटीवी कैमरे
अहिरखेड़ा स्कूल भले ही सरकारी है, लेकिन यहां सुविधाएं प्राइवेट स्कूलों से अच्छी है। प्रत्येक क्लास रूम में स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई होती है। साथ ही पूरा कैंपस सीसीटीवी से लैस है। केंद्र सरकार द्वारा स्कूल को उत्कृष्ट शिक्षा के अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। 30 लाख रुपए बतौर पुरस्कार मिले हैं। इस राशि से स्कूल में आधुनिक लैब बनाई गई है।