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वे कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे और कहते थे, ‘मैं कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण करूंगा’…आज जन्मदिन है
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वे कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे और कहते थे, ‘मैं कांग्रेस मुक्त भारत का निर्माण करूंगा’…आज जन्मदिन है

जानिए- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 10 अनजाने किस्से
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कोटा /जयपुर . भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का आज जन्मदिन है। 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में जन्मे अमित शाह भजपा के सबसे सफल अध्य्क्ष बन गए है, उन्हें आज की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। शाह ही जिन्होंने भाजपा को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाया। आज भाजपा के सदस्यों की संख्या 10 करोड़ के पर हो चुकी है


अमित शाह के 10 अनजाने किस्से

1. अमित शाह का जन्म बड़े व्यापारी अनिलचंद्र शाह के घर हुआ था। शाह बचपन में ही राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे। स्कूल दिनों में वो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेता बन गए।

2. साल 1986 में भाजपा के साथ जुडऩे से पहले उन्होंने स्टॉकब्रोकर का काम किया। 1995 में गुजरात में मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की सरकार के दौरान उन्हें गुजरात राज्य वित्त निगम का चेयरपर्सन चुना गया।

3. मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात अहमदाबाद में 1982 में हुई। उस समय मोदी आरएसएस के प्रचारक थे। आज विपक्षी दलों के पास मोदी-शाह की जुगलबंदी का कोई तोड़ नहीं है।


4. अमित शाह को 1991 में लाल कृष्ण आडवाणी और 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई। यही से शाह बेहतरीन चुनाव प्रबंधक और रणनीतिकार बनकर उभरे।

5. शाह 1997 (उपचुनाव) में गुजरात की सरखेज सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 1998, 2002 और 2007 में लगातार विधानसभा का चुनाव जीता।


6. साल 2002 में गुजरात में नरेंद्र मोदी चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने। मोदी ने उन्हें कई बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी।

7. एक ऐसा भी वक्त था जब शाह के राजनीतिक करियर के दौरान विवादों का दाग भी लगा। 2010 में गुजरात के गृह मंत्री रहते हुए उन पर सोहराबुद्दीन फर्जी इनकाउंटर केस का आरोप लगा। मामला बढ़ता देख उन्हें गृहमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन कोई सुबूत ना मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।


8. सोहराबुद्दीन फर्जी इनकाउंटर केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शाह की दो साल तक गुजरात में एंट्री बैन हो गई थी। यह भी कहा जाता है की जेल में रहते हुए शाह गीता अध्ययन करते थे और रामायण की चौपाइयां कैदियों को सुनाते थे , यही उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत का प्रण लिया था और बाद में जाकर यह भाजपा का चुनावी नारा भी बन गया । साल 2014 के आम चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद अमित शाह राष्ट्रीय नेता के रूप में उभरे।

9. 2014 लोकसभा चुनाव में शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया था। शाह की अचूक रणनीति की बदौलत भाजपा ने कई रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए गठबंधन के साथ 80 में से 73 सीटों पर जीत का परचम लहराया।


10. यूपी में भाजपा के शानदार प्रदर्शन का इनाम भी उन्हें मिला। जुलाई 2014 में अमित शाह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।