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बाजार हस्तक्षेप में लहसुन खरीद की मांग: म​हिलाओं ने लहसुन का हार पहना, किसानों ने सड़क पर फैलाया

बाजार हस्तक्षेप योजना में लहसुन की खरीद की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ की अगुवाई में संभाग भर के किसान सोमवार को सड़क पर उतर आए और संभागीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले कोटा के अलावा बूंदी, बारां व झालावाड़ के किसान टीलेश्वर चौराहा स्थित मानव विकास भवन में एकत्र हुए। यहां से रैली के रूप में हाथों में तख़्तियां लेकर संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे। यहां अपनी मांगों पर अड़े किसान सड़क पर बैठ गए।    

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कोटा

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Abhishek Gupta

Jun 21, 2022

कोटा. बाजार हस्तक्षेप योजना में लहसुन की खरीद की मांग को लेकर भारतीय किसान संघ की अगुवाई में संभाग भर के किसान सोमवार को सड़क पर उतर आए और संभागीय आयुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले कोटा के अलावा बूंदी, बारां व झालावाड़ के किसान टीलेश्वर चौराहा स्थित मानव विकास भवन में एकत्र हुए। यहां से रैली के रूप में हाथों में तख़्तियां लेकर संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे। यहां अपनी मांगों पर अड़े किसान सड़क पर बैठ गए। इससे कुछ देर के लिए दोनों ओर का रास्ता जाम हो गया। सूचना मिलने पर समझाइश कर सड़क से हटाया गया। उसके बाद तीन घंटे महिला और पुरुष किसान चिलचिलाती धूप में सड़क पर ही बैठे रहे। जिससे कुछ महिला किसानों की तबियत बिगड़ गई। जिसे किसान प्रदर्शन स्थल से ले गए।

इस दौरान किसानों ने सड़क पर लहसुन बिखेरकर सरकार का विरोध किया। उसके बाद संभागीय आयुक्त दीपक नंदी से किसानों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल ने वार्ता की। प्रतिनिधिमण्डल में अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य कैलाश गेंडोलिया, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रघुनाथ सिंह, प्रदेश मंत्री जगदीश कलमंडा, प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, प्रदेश महिला प्रमुख राम मूर्ति, सह प्रमुख भारती नागर, संभाग अध्यक्ष विक्रम सिंह सिरोहिया, महिला प्रमुख रमा शर्मा, कोटा जिलाध्यक्ष गिरिराज चौधरी, संभाग मंत्री श्री कृष्ण पाटीदार, बारां अध्यक्ष अमृत छजावा, झालावाड़ अध्यक्ष धनसिंह गुजर, बूंदी जिला मंत्री संतोष दुबे शामिल थे। किसान प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन दिया। जिसमें किसानों ने तीन दिन की चेतावनी दी है। यदि सरकार नहीं चेती तो संभाग भर की मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कराया जाएगा।

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ये रखी मांगे

– किसानों ने बताया कि लहसुन की उपज में किसानों का लागत मूल्य ही नहीं बल्कि कटाई कराकर मंडी तक लाने का खर्च भी निकालना मुश्किल हो रहा है।- राज्य सरकार बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीदी के लिए भेजे गए प्रस्ताव को केंद्र से मंजूरी मिलने के बावजूद भी खरीद नहीं कर रही है।

– सरकार की देरी का खामियाजा किसानों को अपनी उपज औने पौने दामों में बेचकर चुकाना पड़ रहा है। किसानों ने तुरंत लहसुन खरीदी शुरू कराने की मांग की।- किसानों के लहसुन को 5 हजार रुपए क्विंटल की दर से खरीदी का नया प्रस्ताव भेजा जाए।

– विभिन्न पटवार मंडलों में की गई गिरदावरी में अशुद्धियां हैं। जहां लहसुन की बुआई हुई है। वहां सरसों लिखा गया है। ऐसे में इन अशुद्ध गिरदावरी को संशोधित करने के आदेश दिए जाए।- पटवारियों को मुख्यालय पर रुकने के भी आदेश जारी हों।

– गलत गिरदावरी करने के दोषी पटवारियों के खिलाफ कार्यवाही हो।- प्रतिवर्ष किसानों को ग्राम सहकारी समिति से ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। जिस पर 370 रुपए दुर्घटना बीमा व 1138 रुपए सहकार धन सुरक्षा बीमा लिया जाता रहा है। इस राशि को बढ़ाकर 3800 रुपए कर दिया गया है। जो किसानों के साथ अन्याय है। इस बीमा धन की गुपचुप तरीके से वसूली भी की जा रही है। ऐसे में किसानों से इस बढ़ी हुई राशि की वसूली बंद करनी चाहिए।

– क्षेत्र में अधिकांश स्थानों पर किसानों को फसल बीमा राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। सरकार के स्तर पर इस राशि के रुकने के कारणों की जांच कराकर किसानों को शीघ्र बीमा राशि जारी की जाए।-संभाग भर में खरीफ 2021 में नष्ट हुई फसल की मुआवजा राशि दो साल बाद भी जारी नहीं हुई है। संभाग के मुआवजे से वंचित किसानों को शीघ्र मुआवजा राशि का भुगतान किया जाए।

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लोक सभा अध्यक्ष से भी मिले

किसान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मिले। लहसुन खरीदी की अड़चनों को दूर कराने की मांग की। लोक सभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि राज्य के प्रस्ताव पर केंद्र 2 जून को ही मंजूरी दे चुका है। जिसमें नियम पूर्वक आधी राशि वहन करने की बात भी है। अब खरीदी करने का काम राज्य सरकार का है।