14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कोटा

देशभर से आए डॉक्टर्स बोले: कॅरियर के सपनों को साकार करने वाला शहर है कोटा

कोटा कॅरियर के सपनों को साकार करने वाला शहर है। आज कोटा में देश के कोने-कोने से स्टूडेंट डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना संजोकर आते हैं।

Google source verification

कोटा

image

Abhishek Gupta

May 13, 2024

कोटा कॅरियर के सपनों को साकार करने वाला शहर है। आज कोटा में देश के कोने-कोने से स्टूडेंट डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना संजोकर आते हैं। कोटा शहर में जिधर भी नजर जाती है, स्टूडेंट ही स्टूडेंट दिखते हैं। यहां की एजुकेशन व कोचिंग सिस्टम देश में सबसे बेहतर है, इसमें कोई दोराय नहीं। देशभर में कोटा कोचिंग एक बड़ा ब्रांड है। यहां की पढ़ाई का कोई मुकाबला नहीं है। यहां पढ़े स्टूडेंट्स देश-विदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। कोचिंग शिक्षक पढ़ाई के हर कंसेप्ट को बेहतरीन तरीके से पढ़ाते हैं। यहां पढ़ने वाला बच्चा जीवन में किसी भी कॉम्पिटिशन में कभी मात नहीं खा सकता। हर कॉम्पिटिशन में उसे सफलता मिलती है। अभिभावक अपने बच्चों की क्षमता और उनकी रुचि को समझें और उनके अनुसार कॅरियर की ओर आगे बढ़ाएं। कोटा के आने वाले स्टूडेंट अपने लक्ष्य साधने के लिए पूरी शिद्दत और जुनून से जुटें, सफलता आपके कदम चूमेगी। यह बातें देश से कोटा आए डॉक्टर्स ने कहीं। देशभर से आए डॉक्टरों का कहना है कि कॉम्पिटिशन का जो फ्लेवर कोटा में है, वैसा और कहीं नहीं। कोचिंग संस्थान में हर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन मिलता है। पढ़ाई को लेकर तनाव नहीं पालें। चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ें। पत्रिका टीम ने कोटा आए डॉक्टर्स से कोटा के शैक्षणिक माहौल, स्टूडेंट्स के मोटिवेशनल मुद्दों पर खुलकर बात की, पेश है बातचीत के अंश…।

1-2 साल सोशल मीडिया व स्मार्ट फोन को भूल जाएं
‘कोचिंग ऐसा टूल है जो विद्यार्थी के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। रोजाना क्लास में उसे कम्फर्ट जोन से बाहर आने का डोज दिया जाता है, जिससे उसकी इम्यूनिटी बढ़ती जाती है। पढ़ाई करते समय प्रेशर कम करने का वैक्सीन कोटा कोचिंग सिस्टम ही देता है। यहां का कोचिंग सिस्टम आपको अपनी छिपी हुई क्षमता को पहचानने की ताकत देता है। यह आप पर निर्भर है कि प्रेशर में कितना निखरकर बाहर आते हैं। शिक्षकों ने मनोबल बहुत बढ़ाया। हम स्कूली पढाई में जो थ्योरी पढते हैं, उसका तरीका प्रवेश परीक्षाओं में बदल जाता है। कोटा कोचिंग में पेयर ग्रुप आपको पढने का माहौल देता है। टाइम मैनेजमेंट, कंसेप्ट समझने, समर्पित होकर पढाई करने से आप खुद को अपग्रेड करना सीख जाएंगे। इसलिए अपने टारगेट के आगे 1-2 साल सोशल मीडिया व स्मार्ट फोन को भूल जाएं। मैंने पहले प्रयास में ही पीएमटी क्लीयर किया था। उदयपुर से एमबीबीएस करते हुए आईएएस बनने का सपना देखा। पहले प्रयास में इंटरव्यू में सफल नहीं हुआ, लेकिन कोटा कोचिंग की बदलौत हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में यूपीएससी में अच्छी रैंक से चयनित हो गया। गत 19 वर्षों से सिविल सेवा में रहते हुए वलसाड़, भरूच व अहमदाबाद में जिला कलक्टर रहा। इन दिनों गृह मंत्रालय नई दिल्ली में सेवारत हूं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों से आशा रखें, लेकिन अति महत्वाकांक्षी नहीं बनें। अपने बच्चों को प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने के लिए अलख जगाओ। किसी अन्य से तुलना मत करो।
डॉ. विक्रांत पांडे, संयुक्त सचिव, केन्द्रीय गृह मंत्रालय नई दिल्ली

कोचिंग को टारगेट करना गलत

कोचिंग को टारगेट करना गलत है। अभिभावकों में बच्चे के प्रति आकाक्षाएं अधिक रहती हैं। इसके चलते वह कोचिंग को गलत ठहराते हैं, जबकि उन्हें दूसरी चीजों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। कोटा में पढ़ाई का सबसे बेहतर माहौल देखने को मिला है।

डॉ. आशीष शर्मा, धौलपुर

कोई तनाव नहीं

कोटा कोचिंग में पढ़ाई को लेकर कोई तनाव नहीं होता है, खूब मेहनत करें। अभिभावकों को भी समय के अनुसार बदलना होगा। बच्चे की क्षमता से ज्यादा उन पर प्रेशर नहीं डालें। न्यू एजुकेशन पॉलिसी से पढ़ाई का तरीका भी बदल गया। बच्चे को उसके माइंड सेट के अनुसार ही डवलप करें।

डॉ. मोहम्मद रफीक, आरयूएचएस जयपुर

टारगेट लेकर करें पढ़ाई

टारगेट लेकर ही पढ़ाई करनी चाहिए, तभी सफलता मिलती है। कोटा कोचिंग ने हमें राह दिखाई। पढाई को लेकर पहले कोई प्रेशर नहीं था। शिक्षक, परिवार सभी ने सपोर्ट किया। उसकी की बदौलत ही आज हम इस मुकाम तक पहुंचे हैं।

डॉ. रश्मि नागर, जयपुर


कोटा हमारी जान

कोटा हमारी जान है और दिल में बसता है। कोटा में प्रवेश करते हैं तो ऐसा लगता है कि नया कोटा बस गया। कोटा में काफी विकास हुआ है। जब मैं एम्स का एग्जाम देने गया तो पहली बार मुझसे पूछा गया तो मैंने कोटा कचौरी, कोटा साड़ी, कोटा स्टोन के बारे में बताया था, लेकिन आज कोटा कोचिंग के बारे में जाना जाता है।

डॉ. योगेन्द्र विजय, टोंक निवाई

कोटा मिनी इंडिया: बिना टेंशन तैयारी करें

गगनचुम्बी इमारतें देखकर कोटा में मेट्रो शहरों जैसा आभास हो रहा है। जब हम यहां तैयारी कर रहे थे, तब और अब का कोटा बहुत बदल गया है। कोचिंग का स्वरूप भी बहुत बड़ा हो गया है। हम दो-तीन कमरे के इंस्टीट्यूट में पढ़े, आज बड़े-बड़े कैम्पस और कोटा का बदला हुआ नजारा बहुत अच्छा लगता है। बहुत सुखद अहसास होता है जब कोटा और कोचिंग को आगे बढ़ता देखते हैं। कोटा एजुकेशन का बड़ा हब बन गया है। कोटा मिनी इंडिया बन गया है। स्टूडेंट बिना टेंशन के लिए अपना लक्ष्य लेकर तैयारी करें, निश्चित रूप से सफलता मिलेगी।

डॉ. आशीष गोयल, नोएडा एनसीआर-दिल्ली