Wild Life: कोटा. जिला पशु यानी कोटा का शुभंकर ऊदबिलाव (ओटर) इन दिनों चम्बल नदी की अप स्ट्रीम से डाउन स्ट्रीम तक आकर खुलेआम सड़क पर दौड़ लगा रहे हैं। नदी के साफ, गहरे व शांत पानी में इंसानी दखल से दूर रहने वाले यह शर्मीले जीव चम्बल में अक्सर दिखते रहते हैं। रावतभाटा से कोटा तक चम्बल नदी में इनकी संख्या 50 है। पिछले कुछ दिनों से यह कोटा बैराज तक आ रहे हैं। बैराज की पुलिया पर इनकी दौड़ लगाती वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
इस तरह कर रहे विचरण
पगमार्ग फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने बताया कि चंबल नदी से निकलकर ऊदबिलाव कोटा बैराज तक आ रहे हैं। कई बार रिवरफ्रंट की ओर भी चले जाते हैं। झुंड में इनकी संख्या 7 से 9 देखी गई है। हालांकि इनका मूवमेंट थोड़ी देर के लिए ही होता है। पहले इस इलाके में ऊदबिलाव नहीं देखे गए हैं। ऊदबिलाव का इस तरह से आना उनके व्यवहार में बदलाव को दर्शाता है। दुर्लभ श्रेणी के ऊदबिलाव की सुरक्षा को वन विभाग को पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
क्यों आ रहे, बड़ा सवाल ?
हाड़ा के मुताबिक, चम्बल नदी के जिस क्षेत्र में ऊदबिलाव रहते हैं, वहां पर्याप्त मात्रा में मछलियां हैं। यानी भोजन की तलाश में इनका कोटा बैराज तक आना संभव नहीं है। संभव है उस क्षेत्र में मत्स्य आखेट की गतिविधियां होती हों, ऐसे में इन्हें पलायन करना पड़ रहा हो। ऊदबिलाव के विचरण को लेकर उपवन संरक्षक बीजो जॉय ने बताया कि क्षेत्र में ऊदबिलाव का हैबीटॉट है। फिर भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
चंबल में 50 के करीब संख्या
वनकर्मी प्रेम कंवर बताती हैं कि राजस्थान में चंबल नदी में ही ऊदबिलाव पाए जाते हैं। चंबल के इस क्षेत्र में 50 ऊदबिलाव हैं। उत्तरप्रदेश व पश्चिम बंगाल में भी यह दुर्लभ जीव पाए जाते हैं।
मछली है प्रिय भोजन
ऊदबिलाव नदी के पास चट्टानों के बीच आवास बनाते हैं। चंबल की कराइयां ओटर को बेहद रास आ रही हैं। यह एक स्तनधारी मांसाहारी प्राणी है, जो जल-थल दोनों में रह सकता है। मछली इनका पसंदीदा भोजन है।