लखनऊ ऐतिहासिक बड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े तक सातवीं मुहर्रम को निकाला गया शाही मेंहदी का जुलूस। जिसमे भारी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद रहे। यह जुलूस इमाम हुसैन के भतीजे और इमाम हसन के बेटे हज़रत क़ासिम की याद में निकाला जाता है । हज़रत क़ासिम का निकाह भाई की वसीयत के अनुसार इमाम हुसैन की बेटी फ़ात्मा कुबरा के साथ किया गया निकाह के फ़ौरन बाद हज़रत क़ासिम मैदान ए जंग में चले गए।
वहाँ बहुत बहादुरी के साथ उन्होंने जंग की उस समय हज़रत क़ासिम की उम्र 13 साल थी । जो अपने से घोड़े पे चढ़ भी नहीं पाते थे वहा पर उनको घोड़े की टापों से कुचल कर टुकड़े टुकड़े कर दिए गया। जिनकी लाश को एक पोटली में बांधकर इमाम हुसैन खेमे में लाये। आज उन्ही क़ासिम की शादी की याद में मेहँदी का जुलूस निकाला जाता है।