
लखनऊ में बोले आनंदमयी आश्रम के संस्थापक, राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर रखे विचार (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Riteshwar Maharaj Sparks Debate in Lucknow Over Babri Masjid: आध्यात्मिक जगत के प्रख्यात संत और आनंदमयी आश्रम के संस्थापक पूज्य ऋतेश्वर महाराज ने लखनऊ में राष्ट्रीय, सांस्कृतिक और शैक्षिक विषयों पर बेबाक विचार रखे। लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि “हिंदुस्तान में बाबरी मस्जिद के लिए कोई स्थान नहीं है”। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आक्रांताओं की स्मृतियों को ढोने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति और परंपराओं से विकसित हुआ हिन्दू राष्ट्र है।
ऋतेश्वर महाराज का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक विमर्श चल रहा है। उन्होंने अपने वक्तव्य में इतिहास, शिक्षा, राष्ट्रीय अस्मिता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को आपस में जोड़ते हुए वर्तमान परिदृश्य की आलोचनात्मक व्याख्या की।
शनिवार को ऋतेश्वर महाराज लखनऊ प्रवास पर थे। उन्होंने लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा के आवास पर रात्रि विश्राम किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे भेंट कर आशीर्वाद लिया। महाराज ने उपस्थित लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी दिया। उनके आगमन को लेकर राजधानी के धार्मिक और सामाजिक संगठनों में विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे राष्ट्रवादी विचारधारा के लिए प्रेरणादायक बताया।
लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान ऋतेश्वर महाराज ने ब्रिटिश काल की शिक्षा नीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति ने भारत को ज्ञान नहीं, बल्कि मानसिक दासता दी। यह शिक्षा प्रणाली भारतीय संस्कृति, इतिहास और आत्मबोध से छात्रों को काटने का कार्य करती रही है। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में रोजगार तो है, लेकिन राष्ट्रबोध और चरित्र निर्माण का अभाव है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे वैचारिक गुलामी को त्यागकर स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाएं और भारत की आत्मा को समझें।
ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि भारत को अलग से हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह सदैव से हिन्दू राष्ट्र रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिन्दू शब्द किसी पंथ विशेष का नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही रहे हैं, भले ही समय के साथ पूजा पद्धतियां अलग-अलग हो गई हों। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विविधता भारत की शक्ति है, लेकिन इसका आधार सांस्कृतिक एकता होना चाहिए।
‘स्वदेश’ के सवाल पर ऋतेश्वर महाराज ने दो टूक कहा कि “हिंदुस्तान में बाबरी मस्जिद के लिए कोई स्थान नहीं है”। उन्होंने कहा कि भारत में आक्रांताओं के नाम पर बनी इमारतें हमारी राष्ट्रीय चेतना के विपरीत हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि यदि मस्जिद बननी है तो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्वों के नाम पर बने, न कि बाबर जैसे आक्रांताओं के नाम पर। उनका कहना था कि यह देश त्याग, बलिदान और सेवा की परंपरा का है, न कि आक्रमण और दमन की स्मृतियों को सहेजने का।
अपने वक्तव्य में ऋतेश्वर महाराज ने राष्ट्र के खिलाफ कार्य करने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि जो लोग देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ काम करेंगे, उन्हें अपने कृत्यों का फल भुगतना पड़ेगा।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सब कुछ भारतीय संविधान के दायरे में ही होगा। उन्होंने कानून व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए।
ऋतेश्वर महाराज ने तथाकथित ‘लव जिहाद’ को मानवता के विरुद्ध सबसे बड़ा अपराध बताया। उन्होंने इसे एक सुनियोजित और घृणित कृत्य करार देते हुए युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवा अपने धर्म, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहें। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सोच संकीर्ण नहीं है और वे किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं।
आलोचनाओं के बीच संतुलित दृष्टिकोण रखते हुए ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि अल्पसंख्यक भी हमारे अपने हैं। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में सभी वर्गों का योगदान आवश्यक है और समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रवाद का अर्थ किसी के अधिकारों का हनन नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है।
गोंडा के नंदिनी नगर से राष्ट्र कथा कर लौटे ऋतेश्वर महाराज ने कहा कि ऐसी कथाओं से छात्रों और युवाओं में चरित्र निर्माण होता है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों की खुले तौर पर सराहना की। उन्होंने कहा कि संघ जैसे संगठन देश की अस्मिता और अखंडता को बचाने का कार्य कर रहे हैं और समाज में राष्ट्रबोध जगाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस अवसर पर कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रांत प्रचारक श्रीमान कौशल जी, विभाग प्रचारक अनिल जी, लखनऊ उत्तर के विधायक डॉ. नीरज बोरा, गोंडा सदर के विधायक प्रतीक भूषण सिंह, विभाग कार्यवाह अमितेश सिंह, प्रांत संपर्क प्रमुख प्रशांत भाटिया, विशेष गृह प्रांत संपर्क प्रमुख सचिन गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान ऋतेश्वर महाराज का संदेश स्पष्ट रहा-राष्ट्र, संस्कृति और शिक्षा एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। जब तक शिक्षा में राष्ट्र बोध नहीं होगा, तब तक समाज सशक्त नहीं बन सकता। उनके वक्तव्यों ने जहां एक ओर समर्थकों में उत्साह पैदा किया, वहीं राष्ट्रीय विमर्श को एक बार फिर तेज कर दिया है।
Published on:
11 Jan 2026 09:49 am
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