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पत्रिका अभियान : आवंटी मांगे न्याय : पूरी राशि भरने के बावजूद नहीं दिया मकानों का कब्जा
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पत्रिका अभियान : आवंटी मांगे न्याय : पूरी राशि भरने के बावजूद नहीं दिया मकानों का कब्जा

पैसे लेने में अगाड़ी सुविधाएं देने में पिछाड़ी आवासन मंडल, आवंटियों के साथ कर रहा अन्याय-अब आधी कीमत में आवासों की कर रहा नीलामी
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नागौर

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Dharmendra Gaur

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Updated: 13 Dec 2019, 12:16 PM IST

नागौर. आवासन मंडल का ध्येय वाक्य ‘मंडल का है यह सपना, सुंदर घर हो सबका अपनाÓ कागजों में अच्छा लग रहा है। लोगों के अपने घर का सपना साकार करने के लिए 1970 में गठित आवासन मंडल आवंटियों के साथ छल कर रहा है। नागौर में बालवा रोड पर 2013 में विकसित डा. भीमराव अम्बेडकर कॉलोनी में बेहतर सुविधाओं का वादा कर मकान तो बेच दिए लेकिन सुविधाओं के नाम पर कॉलोनी में कुछ काम नहीं करवाया। कॉलोनी विकसित करने को लेकर अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आवंटियों ने भी वहां बसने को लेकर कदम आगे नहीं बढाया। पिछले पांच साल में करीब चार सौ आवंटियों ने मकान वापस कर दिए। गौरतलब है कि ई ऑक्शन व बुधवार नीलामी उत्सव के माध्यम से आवासन मंडल अब तक करीब सवा सौ मकान बेच चुका है।

ठगा सा महसूस कर रहे आवंटी

खंडहर हो रहे मकानों को बेचने के लिए आवासन मंडल ने प्रदेश के 42 शहरों में ई ऑक्शन कार्यक्रम शुरू किया। ई ऑक्शन में आधी दर पर पूरे राज्य में करीब 162 करोड़ के 1000 से अधिक मकान बेच दिए। कॉलोनी में ई ऑक्शन से पहले मकान ले चुके आवंटी मकानों की हालत ठीक नहीं होने व सुविधाएं नहीं होने के चलते चाहकर भी यहां रह नहीं पा रहे हैं। इसी बीच आधी कीमत पर मकानों की बिक्री करने से आवंटी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। आवंटियों की पीड़ा है कि लाखों रुपए देने के बावजूद वे आज तक किरायेदार बनकर रह रहे हैं। ई ऑक्शन में छूट की तर्ज पर मकानों की लीज राशि व पैनल्टी माफ करने की मांग के बावजूद अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं और ना ही कब्जा दिया जा रहा है।

गलती मंडल की, भुगते आवंटी

आवंटियों ने बताया कि मकान का कब्जा पत्र जारी नहीं होने के कारण मकान किराए पर लेकर रहने को मजबूर है। आवंटियों की पीड़ा है कि एक तरफ आधी कीमत पर मकानों का आवंटन किया जा रहा है लेकिन पूरी राशि जमा करवाने के बावजूद कब्जा नहीं दिया जा रहा है और ऊपर से पेनल्टी की मांग की जा रही है। मकानों की दर आधी करने से हम तो खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पांच साल पहले करीब 23 लाख रुपए भरे और उस राशि का ब्याज लग रहा है जबकि वह रहने लायक नहीं है। आवंटियों का कहना है कि मकान आवंटन से अब तक पेनल्टी से भी दुगुना किराया भर चुके हैं।

लीज मनी में दी जाए छूट आवंटी लाखों रुपए जमा करवाने के बावजूद मकानों में रह नहीं पा रहे हैं और अब सरकार आधी दर पर मकान देकर उनके साथ धोखा कर रही है। सरकार आवंटियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लीज मनी व पैनल्टी में राहत प्रदान करें।गायत्री शर्मा, आवंटीभुगतान किया, क्यों दें पैनल्टीमांग पत्र के अनुसार मकान राशि तथा लीज मनी एकमुश्त जमा करवा दी लेकिन मकान का भौतिक कब्जा आज तक नहीं दिया गया। आधी दर पर मकान दे रहे हैं तो पूर्व में मकान ले चुके आवंटियों को भी पैनल्टी में राहत देनी चाहिए।अलका अग्रवाल, आवंटी