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चार से दो स्लैब… जीएसटी आसान या फिर नया जाल…?VIDEO

नागौर. कर सुधार के नाम पर केंद्र सरकार अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चार स्लैब को घटाकर सिर्फ दो रखने की तैयारी कर रही है। एक न्यूनतम और एक उच्च दर तय होगी। सरकार का दावा है कि इससे कर प्रणाली आसान होगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसका वास्तविक लाभ दुकानदारों, […]

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नागौर. कर सुधार के नाम पर केंद्र सरकार अब वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चार स्लैब को घटाकर सिर्फ दो रखने की तैयारी कर रही है। एक न्यूनतम और एक उच्च दर तय होगी। सरकार का दावा है कि इससे कर प्रणाली आसान होगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसका वास्तविक लाभ दुकानदारों, किसानों और आमजन तक पहुंचेगा, या फिर यह भी केवल कागजों में रह जाएगा। हालांकि अभी तक चार स्लैब—5, 12, 18 और 28 प्रतिशत—में वसूली हो रही है। अब जीएसटी ढांचे को घटाकर केवल दो स्लैब में एक न्यूनतम और दूसरा उच्च रखने का प्रस्तावत है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो किराना, अनाज, दलहन से लेकर छोटे दुकानदारों और बड़े कारोबारियों तक पर सीधा असर पड़ेगा। सवाल यह है कि यह कदम राहत का सबब बनेगा या फिर एक और छल साबित होगा…? अथवा यह भी महज चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा।
व्यापारी बोले- टैक्स संरचना होगी सरल, मगर भरोसा कब मिलेगा…?
छोटे दुकानदार और व्यापारी मानते हैं कि फिलहाल चार स्लैब की उलझन में बिलिंग और हिसाब-किताब जटिल हो गया है। अगर दो दरें रह जाएंगी तो कागजी कामकाज घटेगा और कर जमा करना आसान होगा। व्यापारियों का कहना है व्यवस्था आसान जरूर होगी, लेकिन राहत तभी मानी जाएगी जब टैक्स दरें वास्तव में घटें और अधिकारियों का पेनाल्टी का डर खत्म हो। व्यापारियों का तर्क है कि अगर उच्च दर बहुत ज्यादा रखी गई तो फायदा कम और बोझ ज्यादा हो सकता है।
किसान और किराना दुकानदार को राहत का सपना, हकीकत अभी दूर
किसानों को उम्मीद है कि बीज, खाद और कीटनाशकों जैसी सामग्री न्यूनतम दर में आएगी तो खेती का खर्च घटेगा। किराना दुकानदार चाहते हैं कि दाल, चावल, आटा जैसी रोजमर्रा की चीजें भी कम दर पर आएं ताकि बिक्री बढ़े। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक स्पष्ट सूची जारी नहीं होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी कि फायदा मिलेगा या नहीं। महंगाई के मोर्चे पर इसका सबसे सीधा असर दलहन, अनाज और खाद्य वस्तुओं पर पड़ेगा। अगर ये वस्तुएं न्यूनतम दर में रहीं तो थाली सस्ती होगी, लेकिन यदि इन्हें उच्च दर में डाल दिया गया तो महंगाई और बढ़ सकती है।
आमजन को उम्मीद- बिल घटे तो जेब में राहत, वरना फिर छलावा
खरीदारों के लिए यह बदलाव सीधे जेब से जुड़ा है। लोग चाहते हैं कि किराने की बिल राशि घटे और रोजमर्रा का सामान सस्ता हो। नागौर के निवासी बोले कि हर बार सरकार कर सुधार की बात करती है, लेकिन राहत महंगाई में बदल जाती है। अब देखना है कि इस बार वाकई फायदा होगा या फिर जनता को एक और झटका लगेगा।
कागजों में आकर्षक, हकीकत कोसो दूर
जीएसटी स्लैब घटाकर दो करने का प्रस्ताव कागजों में आकर्षक और आसान लगता है। लेकिन जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि किन वस्तुओं को किस दर में रखा जाएगा, तब तक न तो व्यापारी राहत मान सकते हैं और न ही आमजन भरोसा कर सकता है। असली परीक्षा तभी होगी जब जनता की थाली सस्ती और जेब हल्की हो—वरना इसे फिर से छलावा ही कहा जाएगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ …..
स्लैब घटाने से कर ढांचा सरल होगा, लेकिन असली सवाल यह है कि रोजमर्रा की चीजें किस स्लैब में जाएंगी। यदि खाद्य वस्तुएं न्यूनतम दर में नहीं रहीं तो महंगाई और बढ़ सकती है। दो स्लैब का प्रस्ताव राजकोषीय सरलीकरण की दिशा में अच्छा कदम है। इससे टैक्स चोरी पर भी लगाम लगेगी। यदि सरकार ने राजस्व संतुलन के लिए आवश्यक वस्तुओं को भी ऊंचे स्लैब में डाल दिया तो जनता को फायदा मिलने की जगह और बोझ बढ़ सकता है। यह फैसला तभी कारगर होगा, जब आमजन के थाली और जेब पर फर्क साफ दिखे, वरना सारा लाभ कंपनियों और बिचौलियों के पास चला जाएगा।
— कुलदीप जालान, आर्थिक विशेषज्ञ

आमजन की राय
रोजमर्रा का सामान खरीदने वाला हर उपभोक्ता चाहता है कि बिल घटे। किराना दुकानदार का भी यही कहना है कि टैक्स दर घटेगी तो ग्राहक की जेब बचेगी और बिक्री भी बढ़ेगी।् लेकिन इससे पहले भी कई बार कर सुधार की बातें हुईं, और राहत के नाम पर महंगाई ही बढ़ी। यही कारण है कि आमजन इसे लेकर आशंकित भी है।
खुशबू चाण्डक, गृहणी

असली तस्वीर आएगी तो फिर ….
चार स्लैब से दो स्लैब की ओर यह कदम कागजों में आसान और आकर्षक जरूर है, मगर असली तस्वीर तब साफ होगी जब वस्तुओं की सूची सामने आएगी। आमजन से लेकर व्यापारी और किसान तक हर कोई यह जानना चाहता है कि थाली और जेब पर बोझ घटेगा या नहीं।
सीमा अग्रवाल, गृहणी
न्यूनतम स्लैब घटने पर दाल, चावल, गेंहू, शक्कर और किराना सामान की कीमतों में राहत मिल सकती है। इसका सीधा फायदा आमजन व किसानों को होगा क्योंकि उपभोक्ता सस्ती दर पर अनाज खरीदेगा और व्यापारी को टैक्स का बोझ कम उठाना पड़ेगा।
व्यापारियों को मिलेगी पारदर्शिता
चार स्लैब के बजाय दो स्लैब रहने से टैक्स प्रणाली सरल होगी। व्यापारियों को बार-बार अलग-अलग दरों का हिसाब नहीं रखना होगा। कर चोरी और भ्रम की स्थिति भी घट सकती है। आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह व्यवस्था बाजार में पारदर्शिता और कारोबार में तेजी ला सकती है।
दीपक बंसल, व्यापारी
जब टैक्स दरें सरल होंगी तो भुगतान और वसूली आसान हो जाएगी। राजस्व का रिसाव रुकेगा और सरकार को अधिक आय होगी। यह आय किसानों की योजनाओं और आमजन कल्याण के कामों में खर्च की जा सकेगी।आशकां यह भी है कि अगर सरकार न्यूनतम स्लैब बढ़ाकर 8 से 10 प्रतिशत कर दे और उच्च स्लैब 28 प्रतिशत ही रहे तो महंगाई का बोझ और बढ़ सकता है। उस स्थिति में आमजन को राहत मिलने के बजाय जेब पर असर हो सकता है।
विकास पित्ती, आर्थिक विशेषज्ञ