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Nagaur patrika…पशु खरीदकर ले जाने वालों को रास्ते में समस्या नहीं आने दी जाएगी-सी. आर. चौधरी…VIDEO
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Nagaur patrika…पशु खरीदकर ले जाने वालों को रास्ते में समस्या नहीं आने दी जाएगी-सी. आर. चौधरी…VIDEO

नागौर. रामदेव पशु मेले में शुक्रवार को हुए पारितोषिक वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए प्रदेश किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी ने कहा कि राजस्थान अपनी कला संस्कृति के बारे में जाना जाता है। प्रदेश में कुल 12 पशु मेले होते हैं। सभी मेलों में एक से बढकऱ […]
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नागौर. रामदेव पशु मेले में शुक्रवार को हुए पारितोषिक वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए प्रदेश किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी ने कहा कि राजस्थान अपनी कला संस्कृति के बारे में जाना जाता है। प्रदेश में कुल 12 पशु मेले होते हैं। सभी मेलों में एक से बढकऱ एक पशु आते हैं। मेलो में नागौर के मेले को विशेष तौर पर बैलों की खरीद-फरोख्त के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों की समस्याएं उनके संज्ञान में आ चुकी है। वह सरकार एवं प्रशासनिक स्तर पर हरसंभव प्रयास करेंगे कि पशुओं को खरीदकर ले जाने वालों को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पूर्व में बलदेवराम पशु मेले के दौरान पशुपालकों के साथ जो हुआ है। इस बार वैसा बिलकुल नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के डीजी के साथ संयुक्त समन्वय बनाते हुए कार्य किया जाएगा। इसलिए पशुपालक निश्चिंत होकर खरीद का काम करें। उनको रास्ते में परेशानी नहीं आने दी जाएगी। यह भी प्रयास रहेगा कि आगामी मेले के दौरान ट्रेन भी चले, और बैलों को लेकर बाहर जाने वाली समस्याओं का भी निस्तारण हो जाए। प्रेमसुख जाजड़ा ने अपने संबोधन में पशुपालकों की समस्याएं उठाते हुए आयोग अध्यक्ष चौधरी से कहा पशुपालकों को पशु खरीदकर ले जाने के दौरान रास्ते में मारपीट एवं कथित रूप से गोरक्षा के नाम पर उत्पीडऩ से पशु मेले पर ग्रहण लगने लगा है। इसके साथ ही इनको परिवहन की भी समस्या रहती है। इसलिए इसका समाधान होना चाहिए। सरकार गंभीरता से इसका समाधान करेगी तो इसका लाभ प्रदेश के पशुपालकों को निश्चित रूप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह खुद किसान हैं, और किसानों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं। इसलिए पशुपालक व किसानों की समस्याओं का समाधान कराना प्राथमिकताओं में शामिल है। इस मौके पर मुख्य अतिथि चौधरी ने प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं प्रोत्साहन की श्रेणी वाले पशुपालकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में सभापति मीतू बोथरा, पूर्व विधायक मोहनराम चौधरी, एडीएम चंपालाल जीनगर एवं उपखण्ड अधिकारी गोविंद सिंह भींचर थे।
किसान आयोग अध्यक्ष को पता नहीं प्रोत्साहन राशि
किसान आयोग के अध्यक्ष सी. आर. चौधरी को पता ही नहीं कि ऊंट संरक्षण योजना में सरकार ने प्रोत्साहन राशि 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार कर दी। पारितोषिक वितरण समारोह के दौरान मुख्य अतिथि के तौर पर किसान आयोग अध्यक्ष चौधरी ने जब दो बार लगातार यह दोहराया कि इस योजना के तहत सरकार 10 हजार रुपए की राशि दी जा रही है तो इससे हास्यापस्द स्थिति उत्पन्न हो गई। श्रोताओं की दीर्घा में बैठे लोग किसान आयोग अध्यक्ष के इस ज्ञान पर दूसरी ओर देखने लगे। विशेष बात यह रही कि वहां मौजूद अधिकारियों में भी किसी ने उनकी यह तकनीकी त्रुटि बताने की जहमत तक नहीं उठाई।

इनको मिला इतना पुरस्कार
बैल जोड़ी अदंत में प्रथम को 11 सौ, दूसरे को 500, तीसरे को 300 एवं प्रोत्साहन वाले पशुपालक को 150 रुपए की नगद राशि सम्मान स्वरूप दी गई। इसी तरह से बैल जोड़ी 2-4 दांत में प्रथम को 21 सौ, दूसरे को 11 सौ, तीसरे को पांच सौ, और प्रोत्साहन को 250 रुपए मिले। बैल जोड़ी 6-8 दांत में भी पुरस्कार की यही श्रेणी रही। सांड बछड़ा नागौरी में पहले को 11 सौ, दूसरे को 500, तीसरे को 300 व प्रोत्साहन को 150 रुपए मिले। भैंस मुर्रा नस्ल में पहले को प्रथम को 21 सौ, दूसरे को 11 सौ, तीसरे को 500 एवं प्रोत्साहन को 250 रुपए मिले। भैंसा मुर्रा में भी पुरस्कार की यही श्रेणी रही। अश्व वंश में बछेरा/बछेरी में पहले को 11 सौ, दूसरे को 500, तीसरे को 300 एवं प्रोत्साहन को 150 रुपए मिले। घोड़ी प्रजनन योग्य में पहले को 21 सौ, दूसरे को 11 सौ, तीसरे को 500 एवं प्रोत्साहन को 250 रुपए मिले। सांड घोड़ा में पहले को 21 सौ, दूसरे को 11 सौ, तीसरे को 500 एवं प्रोत्साहन को 250 रुपए मिले। सवारी ऊंट, नर ऊंट एवं मादा ऊंट में भी पुरस्कार की यही श्रेणी रही। इस दौरान संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार मीणा एवं उपनिदेशक डॉ. नरेन्द्र चौधरी मौजूद थे।

पशुपालकों के बीच पहुंचे चिकित्सक
पशुपालन के चिकित्सक डॉ. सुरेन्द्र किरडोलिया एवं वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मूलाराम जांगू पशुओं के बीच पहुंचे, और पशुओं की स्थिति देखी। इस दौरान पशुपालकों से बातचीत करने के साथ ही उनके पशुओं का स्वास्थ्य देखा। पशु पालकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।