नागौर. बंशीवाला के दरबार में तीसरी बार किन्नरों का दरबार सजा तो माहौल बदला नजर आया। किन्नरों ने बंशीवाला का पूजन करने के साथ ही साथ फागोत्सव कार्यकम की शुरुआत की। ढोलक थाप पर घुंघरुओं के साथ ही जब फाग के गीत गूंजे तो रंगों की बौछार के साथ माहौल होली के रंग में बदला नजर आया। फागोत्सव में नृत्य करते किन्नरों को देख रहे श्रद्धालु भी मंत्र-मुग्ध रहे। दोपहर में किन्नरों का नृत्य एवं फाग गायन के साथ ढोलक एवं मजीरे की थाप पर शुरू हुआ। घुंघरुओं के शोर के बीच शाम को सात बजे तक नृत्य एवं गीत का संगम चलता रहा। इस दौरान पूरा बंशीवाला मंदिर परिसर न केवल भरा नजर आया, बल्कि फाग की मस्ती के आलम में ढोलक की थाप पर श्रद्धालु भी किन्नरों के साथ नृत्य करने लगे। किन्नरों के बरसाए फूलों से बंशीवाला के प्रांगण में फूलों की चादर बिछी रही।
नगरसेठ बंशीवाला में किन्नर समाज का फागोत्सव देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। फागोत्सव शुरू होने के पहले ही मुख्य गेट से लेकर मंदिर परिसर के अंदर हर ओर श्रद्धालु बैठे नजर आए। किन्नर समाज की रेखा बाई एवं खुशी बाई ने भगवान श्रीकृष्ण का पहले विधिवूर्वक पूजन किया गया। बंशीवाला की वंदना करने के साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत रेखाबाई एवं खुशीबाई के भजन से हुई। गीत प्रस्तुत कर रहे किन्नरों का साथ मौजूद महिला श्रद्धालुओं ने भी दिया। किन्नरों से सुर के साथ श्रद्धालुओं के सुर जुड़े तो बंशीवाला मंदिर परिसर भजनों की सरिता के रंग में डुबा नजर आ रहा है। कार्यक्रम तो केवल एक घंटे का था, लेकिन किन्नरों के भक्तिमय गायन एवं नृत्य के कारण श्रद्धालु शाम तक इनके साथ भक्ति के रंग में देर शाम तक डूबे रहे। भगवान श्रीकृष्ण के साथ ही होली के रंग में रंगे पारंपरिक लोकगीतों के साथ ही राजस्थानी सांस्कृतिक रंग में घुले भजन गूंजते रहे। बंशीवाला में चल रहे कार्यक्रम के चलते मंदिर परिसर के आसपास के मार्गों पर यातायात व्यस्त रहा।
रंगों एवं फूलों की बौछार में भीगे श्रद्धालु
बंशीवाला में चल रहे किन्नरों के फागोत्सव में अबीर एवं गुलाल के साथ फूलों की बौछार हुई तो पूरा परिसर होली के रंग में डूबा रहा। मस्ती के आलम में हर किसी पर गुलाल का रंग पड़ा तो उसका चेहरा बदला नजर आया। अबीर, गुलाल की बौछार से हर श्रद्धालु भीगता रहा। इस दौरान बंशीवाला की मुद्रा में सजीव झांकी भी सजी। बंशीवाला की वेशभूषा में सजे कलाकार ने किन्नरों के साथ मिलकर नृत्य किया तो श्रद्धालुओं ने तालियों एवं भजनों के शोर से वातावरण को गुंजा दिया। श्रद्धालुओं में बंशीवाला का भजन करने की होड़ लगी रही।