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Nagaur patrika…आत्म साधक स्वयं के पुरुषार्थ से आत्म सिद्धि प्राप्त करता है…VIDEO

नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में चातुर्मास में चल रहे प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि आत्म साधक अपने स्वयं के पुरुषार्थ से ही आत्म सिद्धि प्राप्त कर सकता है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम, क्षमा और आत्मनिर्भर साधना ही […]

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नागौर. जयमल जैन पौषधशाला में चातुर्मास में चल रहे प्रवचन में जैन समणी सुयशनिधि ने कहा कि आत्म साधक अपने स्वयं के पुरुषार्थ से ही आत्म सिद्धि प्राप्त कर सकता है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस का प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संयम, क्षमा और आत्मनिर्भर साधना ही मोक्ष-मार्ग का आधार है। मोक्ष-मार्ग पर साधक को दूसरों के सहारे नहीं, बल्कि अपने स्वयं के पुरुषार्थ से ही आगे बढऩा चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और क्षमा बनाए रखें तथा आत्मनिर्भरता के साथ जीवन में आगे बढ़ते रहें। जैन समणी सुगमनिधि जी ने सिद्धों की सेवा, आत्मा की शुद्धता और तन-मन के भेद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आत्मा की सेवा ही वास्तविक मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि कवि ने अपनी स्तुति में सिद्धों की सेवा का संदेश दिया है। सिद्धों की आत्मा और संसारी जीव की आत्मा में भेद केवल कर्म का है। आत्मा का स्वभाव ऊध्र्वगमन है, पर विभाव दशा में वह नीचे गिर रही है। जैसे पानी का स्वभाव शीतलता है। इसे गर्म करने के बाद भी इसकी मौलिक शीतलता बनी रहती है। गरम पानी भी आग को बुझा देता है। उसी प्रकार आत्मा में शुद्धता का स्वभाव सदैव विद्यमान है। शरीर का स्वभाव सडऩा, गलना और नष्ट होना है, पर आत्मा का स्वभाव अमर, शुद्ध और ज्ञानमय है।
प्रवचन में सम्मान व प्रभावना
संघ मंत्री हरकचंद ललवाणी ने बताया कि आज प्रवचन प्रश्नोत्तर में सही उत्तर देने वाले रीता ललवाणी और सुरेश जैन को रजत पदक से सम्मानित किया। संचालन संजय पींचा ने किया। इस दौरान मूलचंद चौरडिय़ा, प्रकाशचंद सुराणा, नरेंद्र चौरडिय़ा, नरपतचंद ललवाणी, राजेंद्र ललवाणी, किशोर पारख, धनराज सुराणा, प्रदीप बोहरा और पुनमचंद बैद आदि मौजूद थे।