नागौर. राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेला रविवार को परंपरागत रौनक, भीड़ और सौदेबाजी के माहौल के बीच संपन्न हो गया। मेला अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार मीणा ने विधिवत ध्वज उतारकर मेले के समापन की घोषणा की। समापन दिन तक मेला परिसर में राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेले में इस वर्ष राज्य के अंदर और बाहर की बिक्री को मिलाकर कुल 2 करोड़ 67 लाख 3 हजार 900 रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। राज्य के अंदर कुल 429 पशुओं की बिक्री हुई। जिससे 1 करोड़ 61 लाख 9 हजार 900 रुपये का कारोबार हुआ। अंदरूनी बाजार में ऊंटों की बिक्री सबसे ज्यादा रही। राज्य के भीतर 412 ऊंट, 11 अश्व वंश, 3 गोवंश और 3 भैंस वंश के पशु बिके। ऊंटों की लंबी कतारें, उनकी बोली और खरीदारों की भीड़ मेला परिसर का मुख्य दृश्य बनी रहीं। बेहतर नस्ल और कद-काठी वाले ऊंटों को अच्छे दाम मिलने से पशुपालकों में संतोष नजर आया। इसी तरह राज्य के बाहर कुल 267 पशुओं की बिक्री दर्ज की गई। इनसे 1 करोड़ 5 लाख 94 हजार रुपये का कारोबार हुआ। बाहरी राज्यों के खरीदारों ने मुख्य रूप से गोवंश में रुचि दिखाई। राज्य के बाहर 230 गोवंश, 27 ऊंट, 6 अश्व वंश और 4 भैंस वंश के पशु बिके। संख्या में बाहरी बिक्री कम रही, लेकिन गोवंश की अधिक खरीद ने बाजार का माहौल बनाए रखा। मेले के दौरान सुबह से शाम तक पशुओं की साज-सज्जा, खरीदारों की परख और मोलभाव का दौर चलता रहा। ग्रामीण वेशभूषा, सौदेबाजी की आवाजें और पशुओं की मौजूदगी ने पूरे मेले को जीवंत बनाए रखा। इस दौरान डॉ. सर्वेन्द्र सिंह मीणा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मूलारामज जांगू, डॉ. रामस्वरूप तोषनीवाल, डॉ. सुरेन्द्र चौधरी, डॉ. शंकरराम पुनिया आदि मौजूद थे।