नागौर. पशु पालन विभाग के जिम्मेदारों की बेपरवाही से पशुओं के नस्ल सुधार संवर्धन योजना की मंशा पर अब पानी फिरता नजर आने लगा है। बताते हैं कि कृतिम गर्भाधान को रिजर्व रूप में रखने के लिए आवश्यक रूप से इस्तेमाल होने वाली लिक्विड नाइट्रोजन की आपूर्ति ही पिछले डेढ़ माह से नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों की माने तो इसके बिना कृतिम गर्भाधान हो ही नहीं सकता है, लेकिन इसके बाद भी आंकड़ों को देखे तो जिले के पशु चिकित्सालयों में प्रतिदिन कृतिम गर्भाधान कराया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि यह आंकड़े कागजी हैं या फिर वास्तव में कृतिम गर्भाधान हो रहा है। पड़ताल के दौरान नाम नहीं बताए जाने पर पशु पालन विभाग के अधिकारी कहते हैं कि कृतिम गर्भाधान तो हो रहा है, लेकिन इसके लिए आवश्यक रूप से इस्तेमाल होने वाली लिक्विड नाइट्रोजन की खरीद खुद पशु पालक ही कर रहे हैं। यह भी यदि सही माने तो डेढ़ माह के अंतराल में पशु पालकों के पेटे केवल नाइट्रोजन की खरीद में उनको लाखों रुपए की चपत विभागीय लापरवाही के चलते लग चुकी है।
लिक्विड नाइट्रोजन नहीं, फिर भी हो रहा कृतिम गर्भाधान…!
पशु पालन विभाग की ओर से जिले में पशु नस्ल सुधार संवर्धन के लिए संचालित योजना में पशुओं का कृतिम गर्भाधान किया जाता है। ताकि पशुओं के नस्ल में सुधार होने के साथ ही इनका दुग्ध उत्पादन बेहतर हो सके। इसके लिए विभाग की ओर से जिले में कुल 187 उपकेन्द्र हैं, और 83 चिकित्सालय स्तर के केन्द्र हैं। इन सभी में कृतिम गर्भाधान कराए जाने के निर्देश हैं। विभागीय जानकारों की माने तो पिछले कुछ समय से कृतिम गर्भाधान की प्रक्रिया लगभग ठप हो चुकी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि पशु चिकित्सा केन्द्रों में आने वाले पशुओं का कृतिम गर्भाधान समुचित तरीके से ही कराया जा रहा है, लेकिन कैसे होता है। इस पर अधिकारिक तौर पर कुछ कहने की अपेक्षा अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
लिक्विड नाइट्रोजन नहीं होने से बढ़ी परेशानी
विभागीय जानकारों के अनुसार पशु चिकित्सा केन्द्रों में पिछले डेढ़ माह से पशुओं के साथ आने वाले पालकों से स्पष्ट रूप से कह दिया जा रहा है कि इसमें आवश्यक रूप से इस्तेमाल होने वाली लिक्विड नाइट्रोजन उनके पास नहीं है। अब ऐसे में वह इसे खरीद कर ले आएंगे तो कृतिम गर्भाधन कर दिया जाएगा, नहीं तो फिर नहीं हो पाएगा। इससे जो पशु पालक बाजार से लिक्विड नाइट्रोजन खरीदकर ले आता है उसके पशु का कृतिम गर्भाधान कर दिया जा रहा है। जो बाजार से लाने में असमर्थता व्यक्त कर देता है तो उसे बैरंग पशु चिकित्सा केन्द्र से वापस लौटना पड़ रहा है। इसके बाद भी कागजी आंकड़े तो यही बताते हैं कि कृतिम गर्भाधान की प्रक्रिया रुकी नहीं चल रही है।
बाजार से आने वाले लिक्विड नाइट्रोजन गुणवत्ता पर भी संदेह
पशु चिकित्सकों की माने तो विभाग की ओर से आपूर्ति में आने वाली लिक्विड नाइट्रोजन की गुणवत्ता शतप्रतिशत होती है। कारण पूरी जांच-परख के बाद ही उसकी आपूर्ति की जाती है। जबकि बाजार से आने वाले लिक्विड नाइट्रोजन की गुणवत्ता भगवान भरोसे रहती है। अब ऐसे में कृतिम गर्भाधान व्यवस्थित तरीके से हो पा रहा है या फिर नहीं…! यही सोचकर पशु पालक भी परेशान हैं, लेकिन वह यह सोचकर नहीं बोल रहे हैं कि उनको तो फिर से पशु अस्पताल ही आना है। अब ऐसे में उन्होंने इस पर सवाल भी उठा दिया तो बाद में उनको ही परेशानी उठानी पड़ेगी। इसलिए वह चुप रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।
जल्द ही आपूर्ति हो शुरू हो जाएगी
इस संबंध में पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार मीणा से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि अभी आपूर्ति तो कुछ समय से नहीं हो पाई है, लेकिन जल्द ही शुरू हो जाएगी। मुख्यालय को भी इससे अवगत कराया जा चुका है। हालांकि विभाग के पास जो उपलब्धता थी। उसकी आपूर्ति केन्द्रों में कर दी गई है। इससे काफी हद तक पशुपालकों को राहत भी मिली है।