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पिच्छी एवं शास्त्र की भेंट मिली तो गूंजने लगा मंगल गान
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पिच्छी एवं शास्त्र की भेंट मिली तो गूंजने लगा मंगल गान

नागौर. दीक्षार्थी मैनादेवी बगड़ा को आचार्य चैत्य सागर महाराज की ओर से नया नाम सुजानश्री माता का नाम मिलने के साथ ही शास्त्र एवं पिच्छी भेंट की गई तो वातावरण आस्था के रंग में बदला नजर आया। आचार्य चैत्य सागर के पादप्रक्षालन जीवराज, सुरेन्द्र कुमार चांदूवाड़ व सुजानश्री माता को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य […]
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नागौर. दीक्षार्थी मैनादेवी बगड़ा को आचार्य चैत्य सागर महाराज की ओर से नया नाम सुजानश्री माता का नाम मिलने के साथ ही शास्त्र एवं पिच्छी भेंट की गई तो वातावरण आस्था के रंग में बदला नजर आया। आचार्य चैत्य सागर के पादप्रक्षालन जीवराज, सुरेन्द्र कुमार चांदूवाड़ व सुजानश्री माता को पिच्छी भेंट करने का सौभाग्य सरोज कुमार, संजय कुमार बाकलीवाल को मिला। कमण्डल भेंट करने का सौभाग्य सुरेश कुमार, सरलादेवी पाटनी, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विजय कुमार, शांतिलाल पाण्ड्या, आहार पात्र भेंट करने का सौभाग्य दीक्षार्थी परिवार सुजानगढ़ वालों को मिला। इसी तरह वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य दीक्षार्थी की बेटियां एवं पोतियों को मिला। केशलौच का सौभाग्य सुरेश कुमार पाटनी, सरलादेवी चूड़ीवाल को मिला। इससे धर्म के माता-पिता दिलीप कुमार एवं सरोज देवी बने। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर मंगल गान से गूंजता रहा। इनके परिजनों में सुशीलादेवी, पदमचंद, गुणमाला, पारसमल, गणपति, हुक्मीचंद, लक्ष्मीदेवी, विमलादेवी, दिलीपराज, आकाश, मोनिका, सरला पाटनी, अजीत कुमार गंगवाल, स्वाती, सजल बाकलीवाल, अनिका आदि भी इस दौरान भक्ति के रंग में उत्साहित नजर आए।