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Nagaur patrika…होली की दस्तक, बाजारों में रंगों की बहार, बाजार में सजने लगी रंग-पिचकारियों की दुकानें…VIDEO

नागौर. शहर में होली आने में अब केवल 10 दिन शेष हैं और इसके साथ ही बाजारों का रंग पूरी तरह बदलने लगा है। मुख्य बाजारों से लेकर अंदरूनी गलियों तक दुकानों पर रंग, गुलाल और पिचकारियों की सजावट शुरू हो चुकी है। फागोत्सव की गूंज के बीच शहर का माहौल उत्साह और उमंग से […]

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नागौर. शहर में होली आने में अब केवल 10 दिन शेष हैं और इसके साथ ही बाजारों का रंग पूरी तरह बदलने लगा है। मुख्य बाजारों से लेकर अंदरूनी गलियों तक दुकानों पर रंग, गुलाल और पिचकारियों की सजावट शुरू हो चुकी है। फागोत्सव की गूंज के बीच शहर का माहौल उत्साह और उमंग से भरने लगा है। सुबह से देर शाम तक बाजारों में चहल-पहल दिखाई दे रही है।

गदर स्टाइल हथौड़ा और कुल्हाड़ी पिचकारी आकर्षण का केंद्र
इस बार बाजार में पारंपरिक पिचकारियों के साथ नए डिजाइन युवाओं को खासा लुभा रहे हैं। गदर फिल्म की तर्ज पर तैयार की गई हथौड़ा पिचकारी और कुल्हाड़ी पिचकारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनकी बनावट और आकार अलग होने के कारण बच्चे ही नहीं, युवा वर्ग भी इन्हें पसंद कर रहा है। दुकानदारों के अनुसार इनकी मांग अन्य पिचकारियों की तुलना में अधिक देखी जा रही है।

नई डिजाइन से सजी दुकानों की रौनक
होली को देखते हुए बाजार में इस बार मैजिक गन, सायरन पिचकारी, मैजिक तलवार, शिवाजी का बिगुल, शिवजी का त्रिशूल, परशुराम का फरसा, विग, भूतों की माला और मैजिक ग्लास जैसे उत्पाद भी उपलब्ध हैं। इसके अलावा होली खेलने के लिए विशेष डिजाइन की टी-शर्ट भी दुकानों पर आई हैं। इन्हें खासतौर पर रंग खेलने के दौरान आकर्षक लुक देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

दस से पांच सौ रुपए तक पिचकारियों की रेंज
नया दरवाजा स्थित दुकानदार चंद्रप्रकाश राकांवत ने बताया कि बाजार में रंग तो हर साल की तरह ही हैं, लेकिन पिचकारियों में इस बार नई विविधता देखने को मिल रही है। युवाओं और बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए डिजाइन तैयार किए गए हैं। पिचकारियों की कीमत दस रुपए से लेकर पांच सौ रुपए तक है, जिससे हर वर्ग का ग्राहक अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी कर सकता है।

शहर के प्रमुख बाजारों में बढ़ी रौनक
नया दरवाजा, अहिंसा सर्किल से सुगन सिंह सर्किल, किले की ढाल, शिवबाड़ी, गांधी चौक और सदर बाजार में होली की तैयारियां स्पष्ट दिखाई दे रही हैं। दुकानों के बाहर सजे रंग-बिरंगे पैकेट और पिचकारियों की कतारें लोगों को आकर्षित कर रही हैं। शाम होते-होते बाजारों में भीड़ बढऩे लगी है और खरीदारी का सिलसिला तेज हो रहा है।

गुणवत्तापूर्ण रंगों की ओर बढ़ा रुझान
इस बार ग्राहकों में रंगों की गुणवत्ता को लेकर भी जागरूकता बढ़ी है। कई लोग केमिकल युक्त रंगों से बचने की कोशिश कर रहे हैं और प्राकृतिक या बेहतर गुणवत्ता वाले गुलाल की मांग कर रहे हैं। दुकानदार भी ग्राहकों को सुरक्षित और त्वचा के अनुकूल रंग खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

मैं खुद ही ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता के प्राकृतिक गुलाल लेने के लिए प्रेरित कर रहा हूं। उनका कहना है कि केमिकल युक्त रंगों से त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए सुरक्षित और प्रमाणित उत्पाद ही खरीदने चाहिए।
गोविंद सारडा, दुकानदार