
विद्वतजनों की बैठक के बाद शास्त्र सम्मत निर्णय जारी किया गया, पूर्व में 1913, 1932, 1951 व 1961 में भी बनी थी ऐसी स्थिति
नागौर. होलिका दहन को लेकर उत्पन्न स्थिति के बीच ज्योतिषाचार्य मोहनराम स्वामी ने विद्वतजनों की बैठक के पश्चात शास्त्रसम्मत निर्णय जारी किया। निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि पूर्णिमा पर ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण तथा भद्रा व्याप्ति के कारण होलिका दहन 3 मार्च को सुबह 5.30 से 6 बजे के मध्य करना उत्तम रहेगा। बैठक में निर्णय सिंधु के श्लोकों का उल्लेख करते हुए जारी निर्णय में भारतीय धर्मग्रंथ निर्णय सिंधु का उल्लेख करते हुए श्लोक उद्धृत किया गया है कि भद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभंगं करोति वै। नगरस्य च नैवस्था तस्मात्तां परिवर्जयेत्॥ भद्रायां नैव कर्तव्या श्रावणी फाल्गुनी तथा। श्रावणी नृपतेर्हन्ति ग्रामे दहति फाल्गुनी इसे स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि भद्रा में होलिका दहन राष्ट्र और नगर के लिए अशुभ फलदायी माना गया है, अत: भद्रा का त्याग करना चाहिए। चंद्रग्रहण संबंधी शास्त्रीय निर्देश में निर्णय सिंधु में दूसरा श्लोक इस प्रकार उद्धृत किया गया है कि अत्र चेच्चन्द्रग्रहणं तथा ततोऽपरनिशि भद्रावर्जितायां पौर्णमास्यां होलिका दीपनीया। अथ परेऽह्नि ग्रस्तोदय: स्यात् पूर्वदिने भद्रावर्जितायां रात्रौ चतुथ्र्यां वा विशिष्टपुच्छे होलिका कार्या। यानि की निर्णय सिंधु में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि पूर्णिमा को चंद्रग्रहण हो तो उससे पूर्व रात्रि में भद्रा रहित समय में होलिका दहन करना चाहिए। यदि दूसरे दिन ग्रस्तोदय हो तो पहले दिन भद्रा रहित अथवा भद्रा पुच्छ में दहन किया जाना चाहिए।
बैठक में हुआ शास्त्रीय निर्णय
मोहनराम स्वामी ने बताया कि नागौर के विद्वतजनों ने उपर्युक्त शास्त्रीय आधारों पर विचार-विमर्श कर निर्णय लिया है कि 3 मार्च को सुबह 5.30 से 6 बजे के बीच होलिका दहन किया जाना शास्त्रसम्मत रहेगा। निर्णय में स्पष्ट किया गया है कि इसमें किसी प्रकार की शंका नहीं है।
3 मार्च को रहेगा चंद्रग्रहण
निर्णय सिंधु के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण रहेगा। भोजन का सूतक सुबह 6.20 बजे से प्रारंभ होगा, जिसमें बाल, वृद्ध एवं आतुर व्यक्तियों को छूट रहेगी। देशाचारानुसार जल का सूतक सुबह 9.20 बजे के बाद मान्य होगा। चंद्रग्रहण दिन में 3.20 बजे प्रारंभ होकर सायं 6.47 बजे शुद्ध होगा। निर्णय सिंधु में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि 21 मार्च 1913 शुक्रवार, 21 मार्च 1932 सोमवार, 22 मार्च 1951 गुरुवार तथा 2 मार्च 1961 गुरुवार को भी इसी प्रकार की स्थिति बनी थी। मोहनराम स्वामी ने नगरवासियों से शास्त्रीय मर्यादा का पालन करते हुए निर्धारित समयानुसार ही होलिका दहन करने का आग्रह किया है, ताकि परंपरा और धर्मविधि दोनों का निर्वाह शुद्ध रूप में हो सके।
Published on:
22 Feb 2026 10:15 pm
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