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राजस्थान: शहीद से किया वादा निभाने आए वीर साथी, बेटी की शादी में ‘पिता’ बनकर निभाई रस्में,विदाई पर छलक उठीं आंखें

नागौर जिले के मेड़ता उपखंड की ग्राम पंचायत कड़वासरों की ढाणी में शनिवार को भावनाओं से भरा एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंख को नम कर दिया।
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नागौर

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kamlesh sharma

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Updated: 22 Feb 2026, 7:02 PM IST

फोटो पत्रिका

नागौर जिले के मेड़ता उपखंड की ग्राम पंचायत कड़वासरों की ढाणी में शनिवार को भावनाओं से भरा एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंख को नम कर दिया। शौर्य चक्र विजेता अमर शहीद भागीरथ कड़वासरा के सैन्य साथियों ने वर्षों पहले शहीद से किया वादा निभाते हुए उसकी पुत्री सुष्मिता की 21 फरवरी को हुई शादी में पिता की भूमिका निभाते हुए सभी रस्में पूरी की।

भारतीय सेना की 13 ग्रेनेडियर्स बटालियन (गंगानगर-जैसलमेर सेक्टर) से 24 जवान खाततौर पर विवाह में शामिल होने पहुंचे। कमान अधिकारी कर्नल सोमेन्द्र कुमार के साथ कई सैन्य अधिकारी तथा सेवानिवृत्त अधिकारी कर्नल सुरेशचंद्र राणा भी मौजूद रहे। सैनिकों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सभी रस्में निभाईं और बेटी को आशीर्वाद दिया। विदाई के समय जवानों की आंखें भर आईं, यह देखकर ग्रामीण भी भावविव्हल हो उठे।

ग्रामीणों का कहना था कि आज के दौर में लोग पारिवारिक जिम्मेदारियों से पीछे हट जाते हैं, वहीं सेना के जवानों ने शहीद साथी के परिवार के प्रति जो आत्मीयता दिखाई, वह अनुकरणीय है। सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी सुष्मिता को आशीर्वाद दिया।

मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत

“जो देश पर मिटे, वही अमर कहलाए” इस पंक्ति को चरितार्थ करने वाले भागीरथ कड़वासरा 8 जून 2002 को असम के मिलनपुर गांव में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी वीरता के सम्मान में 26 मार्च 2003 को भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत किया।

भागीरथ का जन्म

10 जनवरी 1978 को कड़वासरों की ढाणी निवासी हप्पाराम और माता मंगली देवी के यहां हुआ। वर्ष 1995 में वे 13 ग्रेनेडियर्स में भर्ती हुए थे। उनका विवाह टालनपुर निवासी पूरा राम बांगड़ा की पुत्री संतोष से हुआ था। वे अपने पीछे एक पुत्री सुष्मिता को छोड़ गए थे। कनिष्ट साहायक पद पर नियुक्त सुष्मिता की शादी डांगावास निवासी प्रशांत जाखड़ से हुई है।