
accident in merta
नागौर. जिले सहित प्रदेशभर में सड़कों के किनारे या सड़कों पर खड़े भारी वाहन बड़े हादसों का कारण बनते जा रहे हैं। रात के अंधेरे में बिना रिफ्लेक्टर, इंडीकेटर और पार्किंग लाइट के खड़े ट्रक, ट्रेलर और अन्य भारी वाहन अन्य वाहनों के लिए ‘यमदूत’ साबित हो रहे हैं। शुक्रवार को प्रदेश के डूंगरपुर में बाइक सवार तीन लोगों की मौत के बाद शुक्रवार-शनिवार की रात को मेड़ता क्षेत्र में भी इसी तरह का हादसा सामने आया, जिसमें बाइक सवार दो जने सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकरा गए, जिससे चालक की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल हो गया।
अक्सर देखा जा रहा है कि चालक हाईवे या मुख्य सड़कों के किनारे वाहन खड़ा करके वहीं सो जाते हैं। कई बार वाहन खराब होने पर भी उसे बिना किसी चेतावनी संकेत के सड़क पर ही पार्क कर दिया जाता है। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन चालकों को रात में खड़ा ट्रक या अन्य भारी वाहन दिखाई नहीं देता, जिससे हादसा हो जाता है।
प्रदेश के प्रमुख हादसे, जो सड़क पर खड़े वाहनों से हुए
- जयपुर (चाकसू - फरवरी 2026): जयपुर-टोंक रोड पर कार पीछे से ट्रक में घुस गई, जिससे 5 लोगों की जान गई।
- रींगस (फरवरी 2026): कवि केसरदेव मारवाड़ी की कार सड़क किनारे खड़े ट्रक से टकराई, जिंदगी छीन ली।
- जोधपुर (फलोदी- नवम्बर 2025): भारतमाला रोड पर खड़े ट्रेलर के पीछे तेज रफ्तार टेंपो ट्रैवलर टकराई, 15 की मौत।
- दूदू (अप्रेल 2024): बाइक को बचाने के चक्कर में एसयूवी खड़े ट्रक में जा घुसी, 4 लोगों की मौत हो गई।
- जालोर (जून 2022): टायर फटने से खड़े ट्रक में तेज रफ्तार कार टकराई, 5 युवकों की मौत हुई।
हादसों के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हादसों के प्रमुख कारणों में रात में खड़े वाहनों का दिखाई न देना, तेज रफ्तार, लापरवाही और ड्राइवर को झपकी आना है। हाईवे किनारे समुचित रेस्ट एरिया विकसित नहीं होना भी एक बड़ी वजह है। लंबी दूरी तय करने वाले चालक मजबूरी में सड़क किनारे वाहन खड़ा कर विश्राम करते हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार टोल रोड व नेशनल हाइवे कि किनारे निर्धारित मापदंड अनुसार ट्रक चालकों के लिए रेस्ट एरिया विकसित होने चाहिए।
जिम्मेदार विभाग उदासीन
सड़क सुरक्षा सप्ताह या माह के दौरान कुछ वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाकर इतिश्री कर ली जाती है। आमजन का कहना है कि पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई नहीं होने से स्थिति बिगड़ती जा रही है। नियमों के अनुसार भारी वाहन के पीछे रिफ्लेक्टिव टेप, कैट आई और इंडीकेटर अनिवार्य हैं, लेकिन नियमित जांच नहीं होती है।
कैसे रोकें ऐसे हादसे?
- सड़क किनारे खड़े वाहन पर रिफ्लेक्टिव टेप, ट्रायंगल बैरिकेड और चेतावनी लाइट अनिवार्य की जाए।
- वाहन खराब होने पर तुरंत पार्किंग लाइट चालू करें और 20–30 मीटर पीछे चेतावनी संकेत लगाएं।
- हाईवे पर निर्धारित दूरी पर ट्रक ले-बाय और रेस्ट एरिया विकसित किए जाएं।
- ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई और रात्रिकालीन पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
- लंबी दूरी के चालकों के लिए थकान प्रबंधन और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
Updated on:
22 Feb 2026 11:01 am
Published on:
22 Feb 2026 11:00 am
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