वोट चोरी और चुनाव में गड़बड़ी को लेकर मचे बवाल के बीच चुनाव आयोग ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त बने ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन सभी आरोपों का जवाब दिया। साथ ही बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर छिड़े विवाद पर भी उन्होंने जवाब दिया।
दरअसल जबसे बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने ये आरोप लगाए कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर लाखों वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए। विपक्ष का ये भी कहना है कि करीब 65 लाख नाम काटे गए हैं इसमें कई जिंदा लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग किसी भी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विपक्ष में नहीं है। आयोग का काम संविधान के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना है, और वही किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 20 सालों से सभी राजनीतिक दल वोटर लिस्ट में सुधार की मांग करते आ रहे हैं और इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार में वोटर लिस्ट की गहराई से जांच करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रक्रिया में करीब 1.6 लाख बीएलओ बूथ लेवल ऑफिसर्स और सभी राजनीतिक दलों ने मिलकर एक प्रारंभिक लिस्ट तैयार की थी। ये लिस्ट सभी राजनीतिक दलों को दी गई, उन्होंने इस पर हस्ताक्षर भी किए थे। यानी ये काम उनकी सहमति के बाद ही शुरू किया गया था।
चुनाव आयोग का कहना है कि ये सिर्फ एक ड्राफ्ट यानी शुरुआती लिस्ट है। इसमें गलती होना संभव है, और इन्हीं गलतियों को सुधारने के लिए एक अगस्त से एक सितंबर तक का समय दिया गया है। इस दौरान सभी मतदाता और राजनीतिक दल अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। अब तक मतदाताओं की तरफ से 28,370 आपत्तियां आ चुकी हैं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है। आयोग ने सभी से अपील की है कि अगर किसी को कोई गलती लगे, तो तुरंत चुनाव आयोग तक पहुंचाएं। अभी भी 15 दिन का समय बाकी है।
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वहीं इधर, विपक्ष इस पर शांत नहीं बैठा। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने 17 अगस्त से बिहार में “वोट अधिकार यात्रा” शुरू करदी है। ये यात्रा सासाराम से शुरू होकर 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में “वोटर अधिकार रैली” के साथ खत्म होगी। ऐसे में इस पूरे विवाद से साफ है कि बिहार में आने वाले चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमाने वाला है। एक तरफ चुनाव आयोग खुद को निष्पक्ष बता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है। अब देखना होगा कि इस प्रक्रिया में कितनी पारदर्शिता आती है और वोटरों की कितनी समस्याएं सुलझाई जाती हैं।