
इंदौर. इंदौर के विकास के लिए विजन 2047 तथा वर्ष 2030 तक इंंदौर की जीडीपी को डबल करने के लिए आयोजित बैठक में उद्योगपतियों ने कहा कि आने वाला समय एआइ के हिसाब से महत्वपूर्ण है। एआइ हर उद्योग को फायदा देगा, इसलिए एआइ आधारित रिसर्च व डेवलपमेंट सेंटर बनाने की जरूरत है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए स्किल्ड मैन पॉवर तैयार करने पर जोर देते हुए विदेशी यूनिवर्सिटी को लाने की पॉलिसी पर काम करने की आवश्यकता बताई।
एमपीआइडीसी ऑफिस में सांसद शंकर लालवानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में आइटी, फार्मा, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर उद्योगपतियों ने सुझाव रखे। बैठक में बताया गया कि इंदौर की जीडीपी अभी 1.20 लाख करोड़ है, जिसे 2030 तक 2.70 लाख करोड़ करने का लक्ष्य है। सांसद ने बताया कि इंदौर व आसपास करीब 2 लाख करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य जारी हैं। सड़क, रेल और एयर कनेक्टिविटी में सुधार हो रहा है। अर्थशास्त्री डॉ. जयंतीलाल भंडारी ने सभी सेक्टर को लेकर तैयार ब्लू प्रिंट पर कहा, अगले 5 वर्ष में जीडीपी दो गुना से अधिक करने के लिए उद्योग-कारोबार के तेज विकास पर आधारित रणनीति बनाई गई है। एमपीआइडीसी के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश राठौर ने सभी के सुझाव लिए।