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नगरपरिक्रमा में आस्था और संस्कृति को किया जीवंत
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नगरपरिक्रमा में आस्था और संस्कृति को किया जीवंत

गोस्वामी समाधि स्थल बना आस्था का केंद्र परिक्रमा का अंतिम पड़ाव गोस्वामी समाधि स्थल रहा। यहां पहुंचकर महिलाओं ने विधि-विधान से समाधियों का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पीपल वृक्ष का पूजन किया गया, जाल के पेड़ों को चुनरी ओढ़ाई गई और पक्षियों के लिए परिंडे भरकर पानी रखा गया।

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भजन-कीर्तन के साथ की पैदल यात्रा

गडरारोड कस्बे में बुधवार को ब्रह्ममुहूर्त में गलियां भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठीं। सुबह पांच बजे बस स्टैंड स्थित शिव मंदिर से शुरू हुई नगर परिक्रमा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। कई किलोमीटर लंबी इस परिक्रमा के दौरान कस्बे की आस्था और संस्कृति पूरी तरह जीवंत नजर आई।

मार्ग में पड़ने वाले सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्जवलित किए, दान-दक्षिणा अर्पित की और जीव-जंतुओं की सेवा की। नौतपा की भीषण गर्मी की चेतावनी को भी दरकिनार कर बड़ी संख्या में महिलाएं नंगे पांव परिक्रमा करती दिखीं। गांव-कस्बों में ऐसा भक्तिमय दृश्य अब दुर्लभ होता जा रहा है।

गोस्वामी समाधि स्थल बना आस्था का केंद्र

परिक्रमा का अंतिम पड़ाव गोस्वामी समाधि स्थल रहा। यहां पहुंचकर महिलाओं ने विधि-विधान से समाधियों का पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान पीपल वृक्ष का पूजन किया गया, जाल के पेड़ों को चुनरी ओढ़ाई गई और पक्षियों के लिए परिंडे भरकर पानी रखा गया।

हरजस से गूंजा परिसर

महिलाओं के गाए गए हरजस से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पर्यावरण संरक्षण और जीव दया का संदेश देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति का मूल ही प्रकृति और जीव सेवा है।