
महानगर कोलकाता समेत पूरे पश्चिम बंगाल में बुधवार को जीवित्पुत्रिका व्रत आस्था, श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। असीम त्याग और समर्पण के प्रतीक इस व्रत को जीवित्पुत्रिका और जिउतिया के नाम से जाना जाता है। व्रती महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा। दोपहर को बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने महानगर के गंगाघाटों पर जाकर स्नान किया। सूर्यदेव को अघ्र्य दिया। भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना की। घाट पर बैठकर जीमूतवाहन से जुड़ी कथा का श्रवण किया। जुग जुग जिए मोर बबुआ दुलरुआ, जीमूतवाहन देवता से करबो अरजिया गीत गाकर व्रती महिलाओं ने संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।