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गुजरात सरकार सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के नकारात्मक प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए गाइडलाइन बनाएगी। ऐसी पहल देश में पहली बार हो रही है।
राज्य सरकार शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों के लिए यह गाइड लाइन बनाएगी। प्रदेश के शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुलपानशेरिया ने गुरुवार को गांधीनगर में उच्च अधिकारियों के साथ बैठक में इस बात की घोषणा की।
देशभर में पिछले काफी समय से बच्चों के बीच सोशल मीडिया और स्मार्टफोन का उपयोग काफी तेजी से बढ़ रहा है। इसका असर उनकी पढ़ाई और खेलकूद पर पड़ा है। राज्य सरकार बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी, टीचर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों तथा सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सकों के साथ परामर्श कर गाइडलाइन जारी करेगी। यह अभियान बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू किया जाएगा।
कक्षा में मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की योजना
पानशेरिया ने कहा कि बच्चों का सोशल मीडिया-स्मार्ट फोन का ज्यादा उपयोग उनकी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है। बच्चे मोबाइल का कम उपयोग करें और खेलकूद के प्रति ज्यादा ध्यान रुचि बढ़े इसके लिए अभिभावकों और शिक्षकों के लिए एक गाइड लाइन तैयार की जाएगी। इसमें शिक्षकों के क्लासरूम में मोबाइल का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाने और प्राथमिक स्कूलों के बच्चे मोबाइल लेकर स्कूल नहीं जा सके इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
माता-पिता से भी अपील
उन्होंने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के बजाय वे वांचन और खेलकूद जैसी गतिविधियों से जुड़े रहें, इसके लिए स्कूल के शिक्षक उन्हें अवगत कराएंगे। मंत्री पानशेरिया ने बच्चों के माता-पिता से अनुरोध किया है कि बच्चे खुद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करें और माता-पिता भी खुद अपने बच्चों के भविष्य की चिन्ता कर उन्हें सोशल मीडिया से दूर रखें।
गुजरात होगा देश का पहला राज्य
गुजरात देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए गाइडलाइन तैयार करेगा। राज्य सरकार को उम्मीद है कि अन्य राज्य गुजरात से प्रेरणा लेंगे।
महाभियान में सहयोग की अपील
शिक्षा राज्य मंत्री ने एनजीओ, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं से इस महाभियान में शामिल होने की अपील की। इसके अलावा, चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी और टीचर यूनिवर्सिटी के सहयोग से यह अभियान ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। प्रत्येक स्कूल में शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से अभिभावकों को सोशल मीडिया के नुकसान और उसके प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा।
दुष्प्रभावों से बचाने के लिए उपायों पर चर्चा
इस बैठक में बच्चों को इन दुष्प्रभावों से बचाने के लिए उपायों पर चर्चा हुई। बैठक में उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुनयना तोमर, तकनीकी शिक्षा विभाग आयुक्त बंछानिधि पाणी, निदेशक दिनेश गुरु, स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर ललित नारायण संधु और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।