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VIDEO: पूजा सामग्री से बनेगी वर्मी कम्पोस्ट, किसानों को मिलेगा बप्पा का आशीर्वाद

गांधीनगर में गणेशोत्सव के दौरान एकत्रित पूजा सामग्री से वर्मी कम्पोस्ट बनाई जा रही है। किसानों को प्राकृतिक खेती करने में फायदेमंद होगी।

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गांधीनगर महानगर पालिका और जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल करते हुए पूजा सामग्री के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। अब गणेशोत्सव के दौरान बप्पा के चरणों में अर्पित फूल, प्रसाद, मालाएं और अन्य पूजा सामग्री व्यर्थ नहीं जाएगी। प्रशासन के कर्मचारी शहर के पांडालों से इन सामग्रियों को एकत्रित कर वर्मी कम्पोस्ट निर्माण स्थल तक पहुंचाते हैं। वहां गाय के गोबर की खाद के साथ इनका मिश्रण कर विशेष खाद बनाई जा रही है। इसी खाद का उपयोग गांधीनगर जिले के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान करेंगे, जिससे बप्पा के आशीर्वाद की सकारात्मक ऊर्जा खेतों में पहुंचेगी।

इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव और पर्यावरण सुरक्षा

जिले में केवल इको-फ्रेंडली गणेश की मूर्तियों की स्थापना अनिवार्य की गई है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली पीओपी की मूर्तियों पर रोक लगी है, बल्कि पूजा के दस दिनों तक एकत्रित होने वाली सामग्री को भी जलाशयों में प्रवाहित करने की परंपरा थमी है। पहले ये वस्तुएं जलाशयों में डाल दी जाती थीं, जिससे गंदगी फैलती थी और जलाशयों का पानी भी दूषित होता था। इस पहल से न केवल भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचने से रोका गया है, बल्कि प्रकृति को भी राहत मिली है।

महानगरपालिका और जिला प्रशासन ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में पांडालों और विसर्जन कुंडों पर कर्मचारियों को तैनात किया है। ये कर्मचारी प्रतिदिन पूजा के बाद बची सामग्री को एकत्रित करते हैं और तय स्थान तक पहुंचाते हैं। सेक्टर 30 स्थित वर्मी कम्पोस्ट निर्माण स्थल पर इन सामग्रियों को गाय के गोबर के साथ मिलाकर खाद तैयार की जाती है।

किसानों की उन्नति में बप्पा का आशीर्वाद

इस प्रक्रिया से तैयार खाद गांधीनगर जिले के किसानों को वितरित की जाएगी। इससे किसानों को प्राकृतिक और जैविक खाद मिलेगी, जिससे उनकी फसलें बेहतर होंगी। पूजा सामग्री की सकारात्मक ऊर्जा अब अनाज, सब्जी और फलों के रूप में लोगों के घरों तक पहुंचेगी। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है बल्कि समाज में कचरा प्रबंधन और पुनर्चक्रण की जागरूकता भी बढ़ाती है।