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प्रतापगढ़

rescuing the snakes जिले में दो सर्प मित्र रेस्क्यू कर जुटे सांपों को बचाने में

Two snake friends in the district are involved in rescuing the snakes

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rescuing the snakes
राजेश एक वर्ष में करीब तीन सौ, लव कुमार सवा सौ सर्प को करते है रेस्क्यू
प्रतापगढ़. आदिवासी बाहुल्य इलाके में जान-अनजाने में सर्पदंश के बाद इससे बचाव और अन्य जानकारियों के अभाव में आधे मामलों में मौत हो जाती है। वहीं जिले में दो सर्पमित्र ऐसे भी है जो गत आठ वर्ष और तीन वर्ष से सांपों को रेस्क्यू कर बचाने में जुटे हुए है। सर्पमित्र राजेश वर्ष में तीन सौ, लवकुमार ने वर्ष में सवा सौ सर्प को रेस्क्यू कर जान बचाते है। गौरतलब है कि विश्व में पाई जाने वाली सांपों की विभिन्न प्रजातियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने व अंधविश्वास को कम करने के आवश्यकता है। सांपों की प्रजातियों में केवल 17 फीसदी प्रजाति ही ऐसी होती है, जिसे जहरीला माना जाता है। वहीं दूसरी ओर सांप लोगों को बिना कारण नहीं डसते है। ये खतरा महसूस होने पर सेल्फ डिफेंस में डसते हैं। प्रतापगढ़ जिले में इस खतरे की जद में सबसे ज्यादा पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों की आबादी है। इसका कारण यह है कि उनमें सर्प दंश को लेकर जागरूकता की कमी एवं अंधविश्वास है।
सर्पदंश के बाद उपचार आवश्यक
कहीं भी किसी को भी सर्पदंश की घटना होती है तो तुरंत प्रभाव से अस्पताल पहुंचना चाहिए। जिससे उचित समय पर उपचार हो सके।
सांप के बारे में भ्रम
लोगों में भ्रम है कि सांप बीन की धुन पर नाचते हैं। सांप कभी भी बीन की धुन पर नहीं नाचता है, क्योंकि उसके कर्ण विकसित नहीं होते। वो अपनी जीभ से सुनता है। दरअसल सांप बीन की बनावट और उसकी सजावट को देखकर नाचता है। सांप सिर्फ कम्पन महसूस करते है। सांप में स्तन ग्रंथि का अभाव होता है। इनमें दूध को पचाने वाली पाचन कोशिकाएं नहीं पाई जाती। इसलिए वेे दूध का सेवन नहीं करते। सांप दूध पीते हैं। यह एक अंधविश्वास है। कांठल में पाए जाने वाले प्रमुख सांप
जिले में सांपों की विभिन्न प्रजातियां हैं जिनमें जहरीले सांपो में इंडियन कोबरा है जिसे देसी भाषा में नाग कहा जाता है। कॉमन करैत, रसैल वाइपर, स्कैल्ड वाइपर है। वही बिना जहरीले सांपों में रैट स्नैेक जिसे धामण कहा जाता है। कॉमन ङ्क्षट्रकेट रूप सुंदरी, चेकर्ड कील बैक, कॉमन वुल्फ, कॉमन कूकरी है। दलोट के सर्पमित्र पर्यावरण प्रेमी लवकुमार जैन सर्प को बचाने के लिए कुओं में भी उतर जाते है। लव ने अब तक 2 वर्षों में करीब 253 सांपों का रेस्क्यू एवं 50 से ज्यादा मॉनिटर लिजर्ड का रेस्क्यू किया गया है। जिनमें नॉन वेनॉमस एवं हाई वेनेमस रसैल वाइपर, कोबरा भी शामिल है। जैन ने विभाग द्वारा सहयोग करने पर रेस्क्यू सेंटर खोलने की इच्छा जाहिर की वर्तमान में •िाले में एक भी रेस्क्यू सेंटर नही है।हर वर्ष ढाई सौ तीन सौ सर्प रेस्क्यू
जिले में दो प्रमुख सर्पमित्र है। जो सर्प की विभिन्न प्रजातियों का रेस्क्यू कर आबादी क्षेत्र से पकडकऱ़ जंगल में छोड़ रहे है। प्रतापगढ़ निवासी राजेशकुमार सुमन गत 8 वर्षो से प्रतापगढ़ क्षेत्र में लगातार सर्प रेस्क्यू कर रहे है। वे 24 घंटे इसके लिए तैयार रहते है। उन्होंने हर वर्ष करीब 250 से 300 की संख्या में सांप और सौ से डेढ़ सौ मॉनिटर लिजर्ड जिसे आम भाषा में गोयरा कहा जाता है, को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके अनुकूल स्थान पर छोड़ा है।
सांप काटने पर यह करें
जिले के मुख्य सर्प मित्र राजेश कुमार सुमन ने बताया कि जिस व्यक्ति को सांप ने डंसा है, उसे चलने फिरने नहीं देना चाहिए। जिस जगह सांप ने डंसा है उस स्थान के ऊपर रस्सी को घुमा.घुमाकर बांध देना चाहिए। रस्सी ज्यादा कसकर नहीं बांधें। रस्सी बांधने से खून का संचार धीमा हो जाता है और शरीर में जहर तेजी से नहीं फैलता है। व्यक्ति को मनोवैज्ञानिक रूप से आत्मबल बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। विष निकालने के लिए मुंह नहीं लगाना चाहिए। इससे जान का खतरा हो सकता है। मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल लेकर पहुंचें और एंटी वेनम इंजेक्शन लगवाएं। सांप काटने के बाद मरीज को बचाने का यही एकमात्र उपाय है। पर्यावरण में भी होता है प्रमुख स्थान
जिले में मिलने वाले सर्पों में से मात्र करीब 16 प्रतिशत ही जहरीले होते है। वैसे सभी जीवों की तरह यह भी पर्यावरण में अपना महत्व रखता है। वहीं जंगल और फसल चक्र के लिए भी प्रमुख स्थान है। कभी भी सर्प को छेड़े नहीं। कभी सर्पदंश की घटना हो जताी है तो मरीज को तुरंत चिकित्सालय लेकर पहुंचे। मनुष्य को डर और गुस्सा छोडकऱ संयम से काम लेना चाहिए। सर्प के बारे में जागरुक करने के लिए कर्मचरी और स्वयंसेवी संस्थाएं भी कार्य कर रहे है।
सुनील कुमार, उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़.