
प्रदेश सेवा संगठन के सदस्यों ने पत्रकार वार्ता कर दी जानकारी
सागर. निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में संशोधन करते हुए शासन ने नर्सरी से आठवीं तक के स्कूलों में रजिस्टर्ड किरायानामा अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ सुरक्षा निधि 12 से 15 हजार निर्धारित की है। इन नियमों का विरोध निजी स्कूल कर रहे हैं। बुधवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में प्रदेश सेवा संगठन के अध्यक्ष धमेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकार के नियमों के विरोध में गुरुवार को निजी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया किइस साल सरकार ने स्कूल भवनों के लिए पंजीकृत लीज एग्रीमेंट की मांग की है, लेकिन कई स्कूल, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ऐसे एग्रीमेंट के बिना किराए के भवनों में संचालित होते हैं। ये स्कूल इस आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि भवन स्वयं पंजीकृत नहीं है। यदि सरकार ने इन नियमों में बदलाव नहीं किया तो ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को बंद करना पड़ सकता है, जहां सस्ती और सुलभ शिक्षा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है।
सागर संभाग में कई स्कूलों की मान्यता के लिए निरस्त कर दिया। इन स्कूलों को अब मान्यता के लिए भोपाल में अपील करना पड़े। स्कूलों को कमी को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय भी नहीं दिया है। प्रदेश महासचिव उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार के निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम का उद्देश्य हर गरीब बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का है, लेकिन संपूर्ण देश में मध्य प्रदेश ही ऐसा राज्य है, जिसमें निशुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की मान्यता के लिए उपरोक्त वर्णित शुल्क का निर्धारण किया गया है। उन्होंने बताया कि 30 जनवरी को सांकेतिक बंद कर सरकार को सचेत किया जाएगा। इस मौके पर संगठन मंत्री रामक ृष्ण शर्मा, जिला सचिव नरेश विश्वकर्मा एवं जुगल किशोर उपाध्याय आदि मौजूद रहे।