16 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीधी
स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी और कर्तव्य
Play video

स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी और कर्तव्य

जिला अस्पताल बचावा-जिउ बचावा संघर्ष मोर्चा द्वारा सीएचसी मझौली के सामने किया गया सत्याग्रह आंदोलन

Google source verification

सीधी। जिला अस्पताल बचावा-जिउ बचावा संघर्ष मोर्चा द्वारा सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली के सामने सत्याग्रह आंदोलन किया गया। जिला अस्पताल के निजी करण के विरूद्ध गठित इस संघर्ष मोर्चा द्वारा लगातार सत्याग्रह आंदोलन किया जा रहा है।

इस अवसर पर टोंको, रोंको, ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा, प्रत्येक जिले की आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मुख्य रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहती है और जनता को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना सरकार और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। सीधी जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए जिला अस्पताल को निजी हितधारकों को देने की प्रक्रिया राज्य शासन द्वारा शुरू की गई है। प्रत्येक जिले में जिला अस्पताल जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रमुख केंद्र होता है और यहां से सार्वजनिक स्वास्थ्य की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का क्रियान्वयन होता है, साथ ही साथ जिले की गरीब और जरूरतमंद जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को पाने का एक महत्वपूर्ण संस्थान है। जिला अस्पताल को निजी हाथों में देने से जिले की जनता के लिए यह एक घातक कदम होगा और जनता की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निजी संस्थानो को प्राथमिकता देना सरकार का अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्यों से पीछे हटना तथा संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद 47 के अनुसार स्वास्थ्य राज्य का विषय है और इसके अनुसार प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी और कर्तव्य है।

अंतिम दम तक जारी रहेगा संघर्ष-
सरोज सिंह ने कहा, प्रदेश सरकार जिला अस्पताल का निजीकरण करके गरीबों के साथ अन्याय कर रही है, सरकारी अस्पताल कैसी भी हो पर गरीबों के लिए एक उम्मीद थी। लेकिन सरकार के इस निर्णय से निराशा हुई है। बलराज सिंह ने कहा, हम आदिवासी इसके विरोध में अंतिम दम तक संघर्ष करेंगे। शिवम सिंह ने कहा, आज जो महंगाई है वह निजीकरण का ही दुष्परिणाम है। सरकार जिला अस्पताल को निजी हाथों में सौंप कर हम आदिवासियों के जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जा रही है। विवेक कोल ने कहा, सरकार प्रदेश के 10 जिला अस्पतालों को निजीकरण में दे रही है, यह वही जिले हैं जहां गरीब हैं दलित हैं आदिवासी हैं। धरने के बाद राज्यपाल के नाम का 6 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।

इन मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन-
*जिला अस्पताल सीधी के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
*मझौली सीएचसी एवं इसके अंतर्गत आने वाले पीएचसी में रिक्त पदों पर डॉक्टर, महिला डॉक्टर और अन्य स्टाफ कि पदस्थापना की जाए।
*सीएचसी मझौली में एक्स-रे मशीन ऑपरेटर की पदस्थापना कर इसका संचालन सुनिश्चित किया जाए।
*पीएचसी मड़वास को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जाए।
*आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र गिजवार और टिकरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन सुनिश्चित किया जाए।
*मझौली सीएचसी क्षेत्र अंतर्गत अवैध क्लिीनिक, बंगाली डॉक्टर कि एवं अवैध मेडिकल स्टोर की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।