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उन्नाव

कविता तिवारी – चाटुकारिता किसी शब्द में, कभी नहीं आ सकती है अजर अमर हर कालखंड में, मैं भारत की …

साहित्य भारती के 26वें कवि सम्मेलन में रात भर विख्यात कवियों ने बांधा समां, श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

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उन्नाव. साहित्य भारती का 26वां कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह वरिष्ठ साहित्यकार कमला शंकर अवस्थी की स्मृति में कमला मैदान में आयोजित हुआ। विख्यात कवियत्री सरिता शर्मा ने वाणी वंदना पढ़ी वहीं ओज की अनमोल हस्ताक्षर कविता तिवारी ने राष्ट्र वंदना गा कर सबको झंकृत किया। बाराबंकी के राम किशोर तिवारी ने पढ़ा रोशनी खुद तुम्हें देखने आएगी, यह निराशा की चादर हटाए रखो। लखनऊ से आई कविता तिवारी ने तेवर के साथ पढ़ा समय की रेत पर खींची लकीरें मिट भले जाएं, मगर हर एक युग मे सिर्फ कविता गाई जाएगी। इस मौके पर मोहनलाल मिश्र धीरज, वरिष्ठ कवि शिव ओम अम्बर, संस्थापक अतुल मिश्रा, अध्यक्ष चंद्रप्रकाश शुक्ला छुन्ना, गुरुप्रसाद तिवारी, अजेंद्र अवस्थी, महामंत्री मनीष सिंह सेंगर, चन्दनलाल त्रिपाठी, हरिसहाय मिश्र मदन, रवि सहाय मिश्र राधे, दिव्या अवस्थी, सोनी अशोक शुक्ला, ललित मिश्रा, संजय त्रिपाठी, संजय शुक्ला, सहित बड़ी संख्या में संस्था के पदाधिकारी व श्रोता गण मौजूद थे।