
डॉ अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. मोक्ष नगरी काशी में जिन मंदिरों, देव विग्रहों को विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण, विश्वनाथ कॉरिडोर और गंगा पाथ वे के नाम पर मंदिर प्रशासन तोड़ रहा है, वह ऐसे वैसे मंदिर या देव विग्रह नहीं हैं, उन्हें खुद बाबा विश्वनाथ, ब्रह्मा और विष्णु ने स्थापित किया है। उन्हें धर्मराज और यमरा ने बसाया है। इन्हें तोड़ने वाला शात्र हत्या का आरोपी होगा। वैसे मेरे जीते जी काशी नहीं टूट सकती, पहले टूटेगा बटुक। हम इसे नहीं टूटने देंगे। ये कहना है स्वामी करपात्री जी के शिष्य आचार्य बटुक नाथ शास्त्री का। उन्होंने अपने हर वाक्य के समर्थन में शास्त्रों में वर्णित श्लोक भी सुनाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी करारा प्रहार किया। कहा वो क्या जानें शास्त्र और शास्त्र परंपरा।
काशी तो विश्वनाथ का घर है, उन्होंने ही इसे बसाया है
88 वर्षीय शास्त्री जी डेढ़ सौ साल से पीढियों से ब्रह्मनाल में रह रहे हैं। उन्हें केंद्र व राज्य सरकार के इस मंदिर तोड़ो अभियान से बेहत तकलीफ है। बताते हैं कि मैने तो सात साल से क्षेत्र सन्यास ले लिया है। मैं घर के बाहर निकलता नहीं। लेकिन जो जाना है, जो वीडियो के माध्यम से लोगों ने दिखाया है, जो क्षेत्र के लोग बताते हैं वह तो झघन्य है। काशी को तोड़ने का प्रयास, उस काशी को जो बाबा विश्वाथ का घर है, जिसे उन्होंने खुद बसाया है, जिन मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, जिन मंदिरों को ध्वस्त किया जा रहा है वह खुद बाबा विश्वनाथ, भगवान विष्णु, ब्रह्मा, धर्मराज युधिष्ठिर, यमराज और हमारे कोटि कोटि देवों ने बसाया है। उन्हें तोड़ने का तो पाप लगेगा ही, जो उसका विरोध नहीं करेगा वह भी पाप का भागी होगा। शास्त्र हत्या का भागी होगा।
बाबा विश्वनाथ नित्य मध्याह्न में इन गलियों में घूमते व मंदिरों में पूजा करते हैं
उन्होंने कहा शास्त्रों में लिखा है कि बाबा विश्वनाथ द्वारा बसाई गई काशी जो मणिकर्णिका से विश्वेश्वर महादेव तक हैं, असल काशी वही तो बाबा विश्वनाथ का घर है। वह खुद रोज दोपहर में घर से निकलते हैं और एक-एक मंदिर में जाते हैं। हर शिवलिंग की पूजा वह खुद करते हैं और आप उन्हें ही तोड़ रहे हैं। यह कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है।
क्या है काशी में
आचार्य श्री बताते हैं कि प्राचीन काल में घर बनाते वक्त पहले चहरादीवारी बनती थी, फिर बगीचा उसके बाद रहने के लिए आवास। ठीक इसी तरह से बाबा विश्वनाथ ने काशी को बसाया। पहले चहारदीवारी बनी, फिर आनंद वन उसके बाद काशी विश्वनाथ परिक्षेत्र में आवास। कहा कि बाबा विश्वनाथ के घर की चहारदीवारी 25 कोस में है। इसे ही पंचक्रोशी कहते हैं। इसी में आनंद वन और मणिकर्णिका से विश्वेश्वर तक 200 घर हैं। फिर भला अपने आराध्य का घर कैसे टूटने देंगे हम। ये हम सब काशीवासियों का दायित्व है कि उसकी रक्षा करें, उसके लिए अपने प्राण तक न्योछावर करने को तैयार रहे हैं। मैं तो तैयार हूं।
अपनी नगरी के नागरिकों को है बाबा का दो आशीर्वाद
उन्होंने बताया कि नगरी बसाने के बाद बाबा ने यह रहने वालों को दो वरदान दिए। एक जीते जी कोई भूखा नहीं रहेगी और मृतुय के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। इसी कारण इसी विश्वनाथ परिक्षेत्र में मां भगवती का आश्रय स्थल भी है जिन्हें आज अन्नपूर्णा के नाम से जाना जाता है।
इन गलियों में ही होती है अंतरगृही यात्रा
कहा कि इन गलियों को कैसे तोड़ा जा सकता है। इन्हीं गलियों में तो अंतर गृही यात्रा होती है। दरअसल इस यात्रा के माध्यम से हर धर्म प्राण जनता बाबा विश्वनाथ के घर की परिक्रमा करती है। ऐसे में जब गलियां ही नहीं रहेंगी तो क्या खाक सड़क की परिक्रमा करेंगे। तब तो बाबा का घर ही उजड़ जाएगा।
मोदी योगी क्या जानें शास्त्र
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी, सीएम योगी क्या जानें शास्त्र क्या है? क्या कभी शास्त्र का अध्ययन किया है। किया होता तो ऐसा जघन्य कार्य कभी नहीं करते। कहा कि वो गो रक्षा का नारा देते हैं और उनके ही मंत्री, अब मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर कहते हैं मैं गो मांस खाता हूं तो उन्हें छूट दे दी जाती है। ऐसा कहीं होता है।
काशी मोक्ष नगरी है इसे क्योटो क्यों बनाए?
उन्होंने कहा कि काशी में कोटि कोटि देवी देवताओं ने मंदिरों का निर्माण इसलिए किया कि धरती पर यही एक स्थल है जिसके नभ, थल या जल कहीं भी मृत्यु होने पर मोक्ष मिलता है। कीडे मकोड़ों को भी मोक्ष मिलता है और पापियों को भी। और कहीं मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। ऐसे में इसकी रक्षा करना देव धर्म है, शास्त्र धर्म है।
आजादी के पहले पांच नारे दिए गए थे
उन्होंने बताया कि 1946 में पांच नारे दिए गए थे, जिन्हें आजीवन स्वामी करपात्री जी दोहराते रहे। मैं तीन नारे ही बताता हूं, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, गो हत्या बंद हो। ये सरकार इन तीनों में से कुछ भी नहीं कर रही। इसका उल्लेख मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी कर चुका हूं, उनकी बोलती बंद हो गई थी तब।