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इस मंदिर में थी ऐसी अनोखी शक्ति, बड़े से बड़े जहाज भी खिंचे चले आते थे, लेकिन फिर हुआ ऐसा…

सूर्य भगवान का है ये मंदिर यहां दूर-दूर से आते हैं लोग

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नई दिल्ली:भारत देश में कई ऐसे रहस्य हैं, जिन्हें जानकर लोग हैरान रह जाते हैं। चाहे वो भानगढ़ किले के बारे में हो या फिर दिल्ली के लाजपतनगर में मौजूद भूतिया घर के बारे में। ये सभी लोगों को चौंकाते हैं। लेकिन हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका रहस्य आज भी लोगों को चौंकाता है।

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आपने कोणार्क के सूर्य मंदिर ( Konark Temple ) के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन आप यहां के रहस्य के बारे में शायद नहीं जानते। कोर्णाक मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किए गए सूर्य भगवान के साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य कम ही लोग को मिल पाता है। भारत के इस ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया जा चुका है। कहते हैं कि इस मंदिर में 52 टन का विशालकाय चुंबक लगा हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य मंदिर के शिखर पर 52 टन का चुंबकीय पत्थर लगा हुआ था। यह पत्थर समुद्र की कठिनाइओं को कम करता था।

जिसकी बदौलत मंदिर समुद्र के किनारे सैकड़ों दशकों से खड़ा हुआ है। एक समय ऐसा भी था जब मंदिर का मुख्य चुंबक, अन्य चुंबकों के साथ इस तरह की व्यवस्था से सजाया हुआ था। कि मंदिर की मूर्ति हवा में तैरती हुई नजर आती थी। लेकिन मंदिर की ये ताकतवर चुंबकीय व्यवस्था आधुनिक काल की शुरुआत में समस्या बनने लगी। चुंबकीय शक्ति इतनी तेज थी कि पानी के जहाज मंदिर की तरफ खींचे चले आते थे। अंग्रेजों के काल में जब उन्हें नुकसान होने लगा तो उन्होंने मंदिर के अंदर लगे इस चुंबक को निकाल दिया। लेकिन ऐसा करने से मंदिर का संतुलन बिगड़ गया और मंदिर की कई दीवारें और पत्थर गिरने लगे।

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