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इस मंदिर को बनाने के बाद ‘सुबह का सूरज’ नहीं देख पाया था कारीगर, जानें उस रात क्या हुआ था

आपको जानकर हैरानी होगी कि, इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और इसकी अनूठी कारीगरी को सराहते हैं, लेकिन यहां भगवान की पूजा नहीं करते।

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इस मंदिर को बनाने के बाद 'सुबह का सूरज' नहीं देख पाया था कारीगर, जानें उस रात क्या हुआ था

नई दिल्ली। भारत में भगवान शिव के जाने कितने मंदिर बनाए गए हैं लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से 70 किलोमीटर दूर एक कस्बा है थल जिससे लगभग छह किलोमीटर दूर एक गांव सभा बल्तिर है। यहां भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर हथिया देवाल स्‍थित है। इस मंदिर को अभिशप्त शिवालय कहा जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि, इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और इसकी अनूठी कारीगरी को सराहते हैं, लेकिन यहां भगवान की पूजा नहीं होती। यह मंदिर और भी खास इसलिए है क्यों कि यह मंदिर एक दिन में बन के तैयार हो गया था। मान्यताओं के अनुसार पुराने समय में जब इस जगह पर राजा कत्यूरी का शासन था तब इस मंदिर को एक कारीगर ने एक दिन में तैयार कर दिया था।

मान्यता के अनुसार, यह मंदिर एक हाथ से बनाया गया है। कई पुराने ग्रंथों, अभिलेखों में इसका जिक्र करते हुए बताया गया है कि, एक समय यहां राजा कत्यूरी का शासन था। उसे स्थापत्य कला से बहुत लगाव था और वो इस मामले में अपने दौर के दूसरों लोगों से आगे रहना चाहता था। इसके लिए उसने एक बेहद कुशल कारीगर से मंदिर का निर्माण करवाना शुरू किया और एक रात में उसे तैयार करने के लिए कहा। कहा जाता है कि कारीगर पहले एक मूर्ति बनया करता था जिसके कारण उसका साथ खराब हो गया था जिसे गाँव वाले उसे बिगड़ते रहते थे एक रात वह अपनी हथौड़ी और छिनी लेकर चला जाता है और उसे रक चट्टान दिखाई देती है उस चट्टान को कारीगर ने एक ही रात में बना दिया था उसके साथ कारीगर कही चला जाता है उसके बारे में किसी को बता नहीं चलता है। इस कारीगर ने केवल एक हाथ से रातों रात मंदिर को तैयार कर दिया। राजा चाहता था कि कोई और ऐसा मंदिर न बनवा सके। इसलिए उसने उस कारीगर का एक हाथ कटवा दिया। इसके बाद उस मूर्तिकार कहीं गायब हो गया और बहुत ढूंढने से भी नहीं मिला।