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बेटे की चाह में यहां के मर्द अपनी बीवी संग करते हैं ऐसी हरकत, गुनाह को मानते हैं खुदा की मेहर

राजस्थान के बाड़मेर जिले के देरासर गांव के रामदेयो बस्ती में रहने वाले हर पुरूष को अपने जीवनकाल में दो शादियां करनी पड़ती है।

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Arijita Sen

May 30, 2018

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बेटे की चाह में यहां के मर्द अपनी बीवी संग करते हैं ऐसी हरकत, गुनाह को मानते हैं खुदा की मेहर

नई दिल्ली। हमारा देश अनोखी परंपराओं के चलते काफी मशहूर है। देश के तमाम हिस्सों में इन अजीबोगरीब प्रथाओं का आज भी प्रचलन है। हालांकि वर्तमान समय में शिक्षा के प्रसार से नई पीढ़ी इनका पालन न के बराबर करती है लेकिन बावजूद इसके आज भी कई समुदाय इन्हें मानते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही अनोखी प्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे।

हम यहां बात कर रहे हैं राजस्थान के बाड़मेर जिले के देरासर गांव के बारे में जहां मुस्लिम समुदाय के कुल 70 परिवार रहते हैं। इस गांव में शादी की परंपरा बेहद अजीब है। दरअसल इस गांव में दो-दो शादियां करने की परंपरा है। यहां के रामदेयो बस्ती में रहने वाले हर पुरूष को अपने जीवनकाल में दो शादियां करनी पड़ती है।

हालांकि यहां के पुरूष दूसरी शादी तभी करते हैं जब उनकी पहली बीवी बच्चे को जन्म देने में नाकाम रहती है या लड़की जन्म देती है, इन दो स्थितियों में यहां के मर्द दूसरी शादी करते हैं। हैरान कर देने वाली बात ये हैं कि यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि उनकी दूसरी बीवी किसी लड़के को ही जन्म देगी जिसके चलते ये आराम से दूसरी शादी कर लेते हैं।

गांव के बुजुर्गों का मानना कि गांव के जिस पुरुष ने दूसरी शादी की है उसकी पत्नी ने बेटे को ही जन्म दिया है। इनका मानना है कि इसमें कोई गुनाह नहीं है बल्कि ये खुदा का मेहर है।

यहां पुरूषों को बस इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि उनकी दोनों पत्नियां खुश रहें। दोनों को शिकायत का कोई मौका न मिलें। इस गांव की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां पहली पत्नी को अपने पति की दूसरी पत्नी से किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है। ये दोनों आपस में मिलकर रहती हैं।

गांववासियों का ऐसा कहना है कि आजतक गांव में दोनों पत्नियों के बीच विवाद का कोई मसला सामने नहीं आया है। परिवार के बच्चे भी अपनी दोनों मां का पूरा ख्याल रखते हैं और दोनों के बीच कोई भेदभाव नहीं करते हैं।

हालांकि वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई के चलते यहां के नौजवान दो शादी करने से इंकार करते हैं जिस वजह से ये परंपरा अभी कुछ ही परिवारों तक सीमित रह गयी है।