
भारत में बहुत से लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करते हैं। काम के अभाव में और पेट पालने के लिए लोग भीख मांगने को ही जिंदगी जीने का सहारा बना लेते हैं। कभी-कभी ये आदत में भी बदल जाती है तो कभी पेशे में तब्दील हो जाती है। आज हम आपको भीख मांगने को लेकर एक ऐसी प्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे जानकर आप निश्चित रूप से हैरान हो जाएंगे।
जी,हां कानपुर में एक ऐसा समुदाय है जो भीख मांगने को अपना पेशा बनाता है। कानपुर से सटे इस गांव में कपाड़िया नाम की एक बस्ती है। इस बस्ती के सारे निवासी भिखारी है। इस गांव में रहने वाले हर पुरूष की वेशभूषा एक जैसी है और ये सभी भीख मांगने का काम करते हैं।
हालांकि ऐसा वो एक प्रथा के तहत करते हैं जो कि करीब 200 साल से चलती आ रही है। इस अजीबोगरीब प्रथा के तहत यहां हर पुरूष को भीख मांगने का काम करना पड़ता है। यदि कोई ऐसा करने से इंकार करता है तो समुदाय के लोग उसे शादी करने की अनुमति नहीं देते हैं। इस समुदाय के एक बुजुर्ग व्यक्ति का कहना है कि हम घुंमतू समुदाय से हैं।
लगभग दो सौ साल पहले कानपुर के जमीदार मानसिंह ने हमें यहां पर बसाया था। इसके बाद से यही हमारा ठिकाना बन गया है। इसी गांव के रहने वाले एक दूसरे व्यक्ति का कहना है कि हमारी आजीविका भिक्षा पर ही निर्भर है। अगर हम सभ्य लोगों की तरह कपड़े पहनने लगे तो हमारी आजीविका इससे प्रभावित होगी।
कपाड़िया के स्थानीय पार्षद आशोक दुबे का कहना है कि हम मानते हैं कि नौकरी से अच्छा पेशा भीख मांगना है। हम सदियों से ऐसा करते आ रहे हैं। यहां लोगों का ऐसा मानना है कि भीख से हम जितना चाहे उतना कमा सकते हैं। इसकी कोई सीमित राशि नहीं है। खैर, वजह चाहे जो भी लेकिन कही न कही कुछ अन्य लोगों का ऐसा मानना है कि ये लोग ऐसा शिक्षा की कमी के कारण करते हैं।
Published on:
16 May 2018 12:13 pm

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