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सही इंटरप्रेटेशन के साथ अपना जीवन बदलें

आप अपना जीवन बदलना चाहते हैं तो आपको अपने इंटरप्रेटेशन पर ध्यान देना चाहिए

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Amanpreet Kaur

Sep 18, 2017

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आप अपना जीवन बदलना चाहते हैं तो आपको अपने इंटरप्रेटेशन पर ध्यान देना चाहिए। इससे सफलता पर काफी असर पड़ता है। जालंधर में 70 से अधिक वर्षों से मारी अम्मा मेले में अनुयायी 25 फीट लंबे और 4 फीट गहरे गड्ढ़ेे में जलते हुए अंगारों पर चलते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके देवी-देवता खुश होंगे। हम में से कई लोगों के लिए यह अकल्पनीय हो सकता है, पर वे इसे स्वेच्छा से कर रहे हैं, यह विश्वास प्रणाली की शक्ति है। तो हम किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वास प्रणाली की असीमित शक्ति का उपयोग कैसे करते हैं। हर विश्वास प्रणाली आपको कुछ भावनाएं देती है, जैसे- आश्वासन व स्थायित्व महसूस करना, निश्चितता की भावना और दृढ़ता महसूस करना। इन भावनाओं से आप असंभव काम भी कर जाते हैं।

पुरानी धारणाओं को बदलें

त्रासदी की आपकी इंटरप्रेटेशन त्रासदी की तुलना में अधिक भयावह हो सकती है। उदाहरण के लिए जब रवि ने भाषण देने की कोशिश की, तो बाकी सब उसका मजाक उड़ाने लगे। पर रवि ने इस अनुभव से ये निष्कर्ष निकल लिया कि भाषण देने से लोग उसका मजाक बना सकते हैं और जब ये कई बार हुआ तो रवि ने ये धारणा बना ली कि भाषण देने से उसका मजाक उड़ेगा। मौजूदा विश्वास प्रणाली को बाधित करने का तरीका है एक काउंटर विश्वास प्रणाली विकसित करना। समस्या यह है कि हम अपनी पुरानी धारणाओं को बदलने को तैयार नहीं होते।

सकारात्मक स्तंभ बनाएं

लोकप्रिय घटनाएं और उदाहरण इंटरप्रेटेशन का सही स्रोत नहीं हैं। चुनना होगा कि आप किस इंटरप्रेटेशन को आकर्षित करना चाहते हैं। 1900 में पुरुषों की 400 मीटर दौड़ के लिए विश्व रिकॉर्ड समय 47.8 सेकंड था। विश्व में एथलीटों ने यह मानना शुरू कर दिया कि यह न्यूनतम समय जरूरी है। 1999 तक स्पेन के सेविल ने 43.18 सेकंड में इसे कवर किया गया। दक्षिण अफ्रीका के वेन वैन नेरेकर ने ओलंपिक 2016 में इसे 43.03 सेकंड में कवर किया।

विश्वास प्रणाली अपनाएं

अगर आप विपरीत संदर्भ एकत्र करना शुरू कर देते हैं तो व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आशावादी व्यक्ति नई विश्वास प्रणाली को बनाता है, उसे दीवार का छेद प्रकाश लाने का माध्यम दिखता है जबकि निराशावादी व्यक्ति पुरानी मान्यताओं से चिपका रहता है और इसे एक दरार कहता है। यह वही सोच है जो लीजेंड्स को हारे हुए लोगों से अलग करती है। पुराने तरीकों से, पुरानी मान्यताओं से जुड़े रहना, पुरानी बातों पर विश्वास करना, सीमाओं में बंधकर रहना, जो दिखाई दे रहा है उससे परे नहीं सोचना यही हाल है ज्यादातर युवाओं का।

सफल लोगों के उदाहरण

लाखों कहानियां और प्रसिद्ध बातें हैं जो पुरानी मान्यताओं से चिपके रहने के लिए उकसाती रहती हैं। लेकिन सफल लोगों का इतिहास विंस्टन चर्चिल जैसे लोगों से भरा है, जो नोबेल पुरस्कार विजेता और यूनाइटेड किंगडम के दो बार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने। वे छठी कक्षा में विफल रहे और सार्वजनिक कार्यालय के लिए हर चुनाव में पराजित हो गए थे, पर अंत में 62 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री बन गए। अगर वह पुरानी बातों पर विश्वास कर रहे होते तो आज हम उनके बारे में बात नहीं कर रहे होते।

काउंटर विश्वास प्रणाली बनाएं

जब भी आप पुरानी मान्यता के विपरीत कुछ भी करने की कोशिश करते हैं, तो यह केवल तार्किक समझ के कारण होता है जो आपको उस काम के लिए प्रेरित करती है। यह तार्किक समझ फिर भावनाओं में बदल जाती है। यह अहसास वे भावनाएं और अनुभव हैं जो आपकी जिंदगी के हर पहलू से जुड़े हुए हैं। यही अहसास आपकी राय में तब्दील हो जाते हैं। इस तरह आप अपने जीवन में हर चीज के बारे में राय लेते हैं, चाहे वह आपका काम, परिवार, मित्र या कुछ भी हो। एक समान प्रकार के पुनरावृत्तियों के अनुभवों से गुजरते हैं, तो यह दृढ़ विश्वास में बदल जाता है। जब लंबे समय तक इस तरह की धारणाओं से जुड़े रहते हैं तो समय के साथ ये परम सत्य बन जाती हैं ।