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महंगाई सुरसा की तरह मुंह फैला रही

सरकार को करने होंगे ठोस इंतजाम

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Sunil Sharma

May 29, 2018

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- दीप कंवर

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जान हलक में ला दी है। आम आदमी ही क्यों बल्कि समाज के सभी वर्गों को इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ रहा है। हर कोई परेशान इसलिए हैं क्योंकि इससे सीधे-सीधे महंगाई बढ़ रही है। व्यापारी वर्ग भी पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों के कारन वस्तुओं के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो रहे है। आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधनों का इस्तेमाल भी कोई व्यक्ति तब ही करना चाहेगा जब इनकी बहुतायत और आसानी से उपलब्धता रहे। सब जानते हैं कि पिछले सालों में दुपहिया व चारपहिया वाहनों की तादाद काफी बढ़ी है।

पेट्रोल और डीजल पर वेट टैक्स कम करने पर ही जनता को मंहेगे पेट्रोल-डीजल से राहत मिल सकती है। एक उपाय यह भी हो सकता है कि सरकार इन उत्पादों पर भी जीएसटी लागू करे। यह चिंता का विषय है कि एक ओर आम जनता पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे से महंगाई की मार झेल रही है। दूसरी ओर केन्द्र सरकार अपने चार साल पूरे होने का जश्न मनाने में जुटी है। चार साल पूरे होने का जश्न मनाना क्या दर्शाता है? क्या जनता के अरवों रुपये जश्न में फूंकने का सरकारों को अधिकार है? जिस तरह से अपनी थोथी उपलब्धियो का ढोल पीटा जा रहा है,वह न्यायोचित नहीं माना
जा सकता।

हकीकत तो यह है कि इन चार सालों में केन्द्र सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है। समाज का कोई भी तबका इस सरकार से खुश नजर नहीं आता। वहीं किसान, मजदूर, महिला, आम नागरिक, अनुसूचित जाति, जनजाति, व्यापारी सहित सब परेशान हैं। जनता को अच्छे दिन लाने का वादा कर सत्ता में आई सरकार एक तरह से जनता से विश्वासघात ही कर रही है। महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार ने देश की जनता की परेशानी बढ़ाई है। वहीं पेट्रोल, डीजल की बढती कीमतों ने हर वर्ग के हितों पर कुठाराघात किया है। सरकार ने किए वादों को नहीं दिखाया। विदेश नीति के मोर्चे पर भी यह सरकार खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पाई। पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन हमको आंख दिखा रहे हैं। सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ जारी है।