
एलन मस्क और पीएम मोदी (फोटो- एएनआई)
पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक आर्थिक संतुलन में धीरे धीरे बदलाव देखा जा रहा है। विकसित देशों की तुलना में उभरती अर्थव्यवस्थाएं अधिक तेज गति से आगे बढ़ रही हैं और एशिया इस बदलाव का केंद्र बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान अमेरिका से अधिक रहा है। इसे लेकर स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है। मस्क ने इसे पावर के बैलेंस में बदलाव बताया है।
IMF के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान करीब 17 प्रतिशत होगा। इसके मुकाबले अमेरिका का योगदान लगभग 9.9 प्रतिशत आंका गया है। चीन इस सूची में पहले स्थान पर है, जबकि भारत दूसरे नंबर पर पहुंच चुका है। इसका अर्थ है कि केवल भारत और चीन मिलकर वैश्विक आर्थिक वृद्धि का बड़ा हिस्सा संचालित कर रहे हैं। अमेरिका जैसी महाशक्तियों की विकार दर अपेक्षाकृत धीमी रहने का अनुमान लगाया गया है।
पावर के इस बदलाव को लेकर मस्क ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में बदलाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि पावर का संतुलन बदल रहा है। मस्क ने 2026 की वैश्विक जीडीपी वृद्धि में योगदान देने वाले टॉप 10 देशों की लिस्ट भी शेयर की है। इसमें चीन और भारत के बाद अमेरिका का स्थान है। इस सूची में 3.8 प्रतिशत योगदान के साथ इंडोनेशिया, 2.2 प्रतिशत योगदान के साथ तुर्की, 1.5 प्रतिशत योगदान के साथ नाइजीरिया और अन्य कई देश शामिल है।
मस्क का इसे पावर के संतुलन में बदलाव बताना यह दर्शाता है कि बड़े वैश्विक कारोबारी समूह भारत को भविष्य के बड़े बाजार और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रहे हैं, जहां घरेलू मांग और निवेश की संभावनाएं मजबूत हैं। साल 2026-27 का बजट पेश करने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी मस्क के इस पोस्ट का जिक्र किया। वित्त मंत्री ने मस्क के इस पोस्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि भारत तेजी से दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन रहा है। हालांकि फिलहाल भारत चीन से पीछे है लेकिन अमेरिका से कहीं आगे निकल गया है। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष को देश की काबिलियत पर विश्वास होना चाहिए।
Published on:
02 Feb 2026 05:30 pm

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