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भारत में इस साल के शुरुआती नौ महीनों (273 दिनों) में लगभग हर दिन मौसम की स्थिति चरम पर पहुंचने के घटनाएं देखी गईं जिनमें करीब 3,000 लोगों की मौत हो गई। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। एनजीओ ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवॉयरमेंट’ (सीएसई) द्वारा वर्ष 2023 में जलवायु की चरम स्थितियों पर जारी रिपोर्ट के अनुसार मौसम से लिहाज संवेदनशील देश में जनवरी से सितंबर 2023 तक लगभग 86 प्रतिशत दिनों (235 दिन) में मौसम की स्थितियां चरम बनी रहीं। यानी अत्यधिक सर्दी, अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक वर्षा, बिजली और तेज हवा जैसे हालात बने। इतना ही, नहीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2022 के 273 दिनों में 241 दिन इसी तरह की चरम मौसम स्थितियां थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर और मध्य भारत में मौसम की चरम स्थितियां और इनमें भारी उतार चढ़ाव सबसे अधिक देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में तो हर दूसरे दिन मौसम की चरम स्थितियां देखी गईं। दक्षिणी क्षेत्र में केरल में सर्वाधिक दिन (67) तक मौसम के चरम स्थिति पर पहुंचने संबंधी घटनाक्रम देखा गया, वहीं उत्तर पश्चिम भारत में उत्तर प्रदेश में 113 दिन के साथ यह स्थिति सर्वाधिक दिन रही।
बिहार में सबसे अधिक मौतें, हिमाचल में सबसे अधिक टूटे घर
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में 2,923 लोगों की मृत्यु हो गई, 18 लाख 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसल बर्बाद हो गई, 80563 हजार घर तबाह हो गए और 92519 मवेशी मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार चरम मौसम स्थितियों के कारण मृत्यु के सर्वाधिक मामले बिहार (642), हिमाचल प्रदेश (365) और उत्तर प्रदेश (341) में दर्ज किए गए। हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक 15407 घर नष्ट हुए और पंजाब में सबसे अधिक 63649 जानवरों की मौत हो गई। जबकि तेलंगाना में फसल नष्ट होने का क्षेत्रफल सबसे अधिक रहा।
मप्रः अति मौसम के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में फसल क्षति नहीं
रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में इस वर्ष अब तक 138 दिनों में चरम मौसम स्थितियां अनुभव की गईं हैं। इसके बावजूद, सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड मौसम के कारण किसी प्रकार की फसल क्षति का संकेत नहीं है। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कम से कम 45,000 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित है। रिपोर्ट के अनुसार, आंकड़ों में यह विसंगति हानि और क्षति रिपोर्टिंग में अंतराल के कारण हो सकती है।
सामान्य से गर्म रही इस बार सर्दियां
इस साल सर्दियों में तापमान से जुड़े आंकड़ों को देखें तो जहां जनवरी का महीना औसत से थोड़ा अधिक गर्म रहा, जबकि फरवरी 2023 में तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा दर्ज किया गया और ये 122 सालों में सबसे गर्म फरवरी माह रहा। फरवरी का औसत तापमान सामान्य (1981-2010 के औसत तापमान) से 1.36 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया वहीं दिन के समय का औसत तापमान 1.86 डिग्री अधिक रिकॉर्ड किया गया। उत्तर पश्चिम भारत
विशेष रूप से गर्म रहा, जहां औसत से 2.78 तापमान अधिक दर्ज किया गया। इस दौरान न केवल तापमान में इजाफा दर्ज किया गया साथ ही दोनों महीने भी सामान्य से कहीं ज्यादा शुष्क रहे। रिपोर्ट के अनुसार जहां जनवरी में होने वाली बारिश में 13 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जो फरवरी में 68 फीसदी तक पहुंच गई।
ऐसा रहा मानसून का हाल
इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून सात दिनों की देरी के बाद आठ जून 2023 को आया। हालांकि इसकी शुरूआत धीमी रही, लेकिन गति पकड़ने के बाद इसने सामान्य से करीब 15 दिन पहले ही 30 जून तक पूरे देश को कवर कर लिया था। मानसून के दौरान करीब-करीब सभी 122 दिनों में मौसम की चरम घटनाओं की सूचना मिली, जिन आपदाओं के चलते 2,594 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। इस दौरान करीब 8.1 लाख हेक्टेयर में फसलों को नुकसान पहुंचा है, जबकि 80,563 घर क्षतिग्रस्त हो गए थे।
जीवनकाल में एक बार होने वाली घटनाएं हो रही पांच साल में एक बार
जो चरम घटनाएं हर सौ वर्षों में यदा कदा एक बार घटती होती थीं, वे अब हर पांच वर्षों में या उससे भी अधिक बार घटित हो रही हैं। जिस तरह से महीन-दर-महीने नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, उनसे स्थिति कहीं ज्यादा बदतर हो रही है। बुरा यह है कि यह सब एक साथ घटित हो रहा है। पिछले नौ महीनों में सभी प्रकार की चरम मौसम घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस दौरान सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली गिरने और तूफान आने की सूचना मिली, जिसके चलते 711 लोग हताहत हुए हैं। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब तबके को भुगतना पड़ रहा है। जो न केवल इससे सबसे ज्यादा प्रभावित है, बल्कि बार-बार होने वाली इन घटनाओं से निपटने की अपनी क्षमता को भी तेजी से खो रहा है।
Published on:
30 Nov 2023 12:09 am

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