
रूस यूक्रेन वार (फोटो-IANS)
Massive Destruction:रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग ने अब एक बेहद विनाशकारी और सांस्कृतिक रूप ले लिया है। रूसी सेना ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा और समन्वित हवाई हमला किया है। आसमान से एक साथ सैकड़ों मौत के सामान बरसे, जिससे न केवल सैन्य ठिकाने और रिहायशी इलाके दहल उठे, बल्कि इतिहास के पन्नों में दर्ज एक अनमोल धरोहर को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यूक्रेनी वायु सेना और रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रूस ने एक ही रात में यूक्रेन के अलग-अलग शहरों पर 70 से ज्यादा क्रूज मिसाइलें और करीब 450 कामिकेज ड्रोन (आत्मघाती ड्रोन) दागे। यह हमला इतना भीषण था कि यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम को भी इसे पूरी तरह रोकने में पसीने छूट गए। धमाकों की गूंज से राजधानी कीव समेत कई प्रमुख शहर थर्रा उठे। बिजली ग्रिड और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के साथ-साथ इस बार रिहायशी इलाकों में भी भारी तबाही देखी गई है।
WWII स्मारक क्षतिग्रस्त इस हमले की सबसे दर्दनाक तस्वीर कीव से आई है, जहां सोवियत युग का प्रतिष्ठित द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक (World War II Memorial) क्षतिग्रस्त हो गया है। यह स्मारक नाजी जर्मनी पर जीत और उन सैनिकों की याद में बनाया गया था जिन्होंने फासीवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। विडंबना यह है कि यह स्मारक सोवियत संघ के साझा इतिहास का हिस्सा था, लेकिन रूसी मिसाइलों ने इसे भी नहीं बख्शा। स्मारक के पास गिरे मलबे और शॉकवेव के कारण इसकी संरचना को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि उनकी पहचान और बलिदान का प्रतीक थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात हवाई हमले के सायरन बजते रहे। लोग बंकरों और मेट्रो स्टेशनों में छिपे रहे। 450 ड्रोनों का एक साथ हमला करना रूस की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसे 'स्वार्म टैक्टिक' (Swarm Tactic) कहा जाता है। इसका मकसद यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम को उलझा कर मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाना था। इस हमले ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे लाखों लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे केवल सैन्य हमला नहीं, बल्कि "सांस्कृतिक नरसंहार" करार दिया है। उनका कहना है कि रूस जानबूझकर यूक्रेन की ऐतिहासिक पहचान और स्मारकों को निशाना बना रहा है ताकि लोगों के मनोबल को तोड़ा जा सके। वहीं, बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने और आग बुझाने में लगातार जुटे हुए हैं।
वोलोडिमिर जेलेंस्की: यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इसे "कायरतापूर्ण कार्रवाई" बताते हुए कहा कि रूस अब इतिहास और यादों से भी डरने लगा है। उन्होंने पश्चिमी देशों से तत्काल और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की मांग की है।
यूनेस्को (UNESCO): सांस्कृतिक धरोहरों को निशाना बनाने पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने चिंता जताई है। इसे युद्ध अपराधों की श्रेणी में देखा जा रहा है।
स्थानीय नागरिक: कीव के बुजुर्ग नागरिकों का कहना है, "यह स्मारक हमारे पूर्वजों की याद दिलाता था, रूस ने अपने ही दादा-परदादाओं की विरासत पर बम गिराया है।"
यूक्रेन का पलटवार: क्या यूक्रेन अब रूस के भीतरी इलाकों में ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ाएगा?
पश्चिमी मदद: क्या इस हमले के बाद अमेरिका और नाटो देश यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट सिस्टम की नई खेप भेजेंगे?
स्मारक की मरम्मत: क्या युद्ध के बीच क्षतिग्रस्त स्मारक को बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई मुहिम शुरू होगी?
यह हमला एक गहरी विडंबना (Irony) को उजागर करता है। जिस सोवियत स्मारक को रूस ने निशाना बनाया, वह उस दौर का गवाह है जब रूस और यूक्रेन एक ही झंडे (सोवियत संघ) के नीचे नाजियों के खिलाफ लड़े थे। यह हमला दिखाता है कि मॉस्को अब उस "साझा इतिहास" की भी परवाह नहीं कर रहा, जिसकी दुहाई देकर वह अक्सर इस युद्ध को सही ठहराने की कोशिश करता है। यह घटना यूक्रेन के लोगों में रूस के प्रति नफरत को और गहरा करेगी, क्योंकि अब बात जमीन के टुकड़े से आगे बढ़कर "पुरखों के सम्मान" तक पहुंच गई है।
Published on:
03 Feb 2026 03:19 pm

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