
विकसित देशों में जहां शराब की खपत कम हो रही है, वहीं भारत जैसे देशों में इसकी खपत बढ़ रही है। विकसित देशों में भी विशेषकर युवाओं में शराब की खपत कम हो रही है। जर्मनी, कनाडा, यूरोप के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां अब शराब का उपभोग अब कोई कूल चीज नहीं रह गई है।
जर्मनी में एक दशक में 12.2 फीसदी घटी खपत
जर्मनी का नाम यूरोप में सबसे अधिक शराब पीने वाले देशों में शुमार होता आया है। पर यहां बीयर की खपत के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से जून 2023 में इसकी खपत 2.9 फीसदी गिरावट के साथ 4.2 अरब लीटर रह गई। जर्मन फेडरल स्टेटिस्टिकल ऑफिस के इन आंकड़ों में घरेलू खपत, निर्यात और अन्य यूरोपियन देशों से आयात की गई - सभी प्रकार की बियर शामिल है। लेकिन इसमें एल्कोहर फ्री बीयर शामिल नहीं है। इसमें भी घरेलू बीयर की खपत 3.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसका हिस्सा कुल खपत में 82 फीसदी हिस्सा है। इसी तरह से निर्यात में भी 0.4 फीसदी की गिरावट देखी गई। गौर करने की बात ये है कि अगर मौजूदा छमाही में बीयर की खपत की तुलना पिछले 10 साल पहले के दशक से करें तो इसमें 12.2 फीसदी बड़ी गिरावट देखी जा सकती है।
कनाडा निवासी भी बना रहे दूरी
इसके पहले मार्च 2023 में कनाडा के आंकड़ों से भी यह सामने आया था कि यहां शराब की खपत में एक दशक में 1.2 फीसदी की कमी आई थी, जिसमें सबसे अधिक वाइन की खपत में 4 फीसदी की कमी आई थी। पिछले एक दशक से तुलना करें तो यहां भी बीयर का बाजार 8.8 फीसदी कम हुआ है। इनके मार्केट शेयर को फ्रूट जूस बीयर कैटेगरी की बीयर ने भरा है।
युवाओं में घट रहा पीने का चलन
जर्मन सेंटर फॉर हेल्थ एजुकेशन 2004 से ही बिंज ड्रिंकिंग पर सर्वे कर रहा है। किसी पार्टी में कम-से-कम पांच ड्रिंक लेना बिंज ड्रिंकिंग कहलाता है। इस सर्वे के अनुसार, 12 से 25 साल के आयुवर्ग में शराब का सेवन घट रहा है। 2004 में जहां 12 से 17 साल के किशोरों में 21 फीसदी का कहना था कि वे हफ्ते में कम-से-कम एक बार जमकर पीते हैं, वहीं 2021 में यह आंकड़ा घटकर करीब 9 फीसदी ही रह गया। 18 से 25 साल के मिलेनियल युवाओं में भी यही रवैया दर्ज किया गया। इस आयुवर्ग में यह आंकड़ा 2004 में 44 फीसदी था, वहीं 2021 में घटकर 32 प्रतिशत पाया गया।
भारत सबसे तेजी से बढ़ता बाजार
यूरोप और पश्चिमी देशों में जहां शराब कम पीने का रुझान है वहीं भारत एल्कोहल पेय पदार्थ का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। स्टेटिस्टा के एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 2022 से 25 के बीच एल्कोहल पेय पदार्थ का बाजार 8.86 फीसदी की दर से बढ़ेगा।
शराब पीने से दूरी, दो अहम कारण
अध्ययनों के मुताबिक, सोशल मीडिया के युग में अब अपने पर काबू रखना युवाओं के लिए अहम होता जा रहा है। कोई भी बेकाबू हालात में सोशल मीडिया पर नहीं दिखना चाहता, इसलिए वे उतनी ही पी रहे हैं कि काबू में रह सकें।
कोरोना महामारी के बाद से सेहत के प्रति सजगत बढ़ी है। कई अध्ययन स्पष्ट बताते हैं कि शराब की जरा सी भी मात्रा हानिकारक है। ऐसे में अब पीने को कूल समझने की प्रवृत्ति घट रही है।
Updated on:
02 Aug 2023 07:03 am
Published on:
01 Aug 2023 11:25 pm
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