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Greenland Dispute: ट्रंप की टैरिफ धमकी से अमेरिका-यूरोप तनाव चरम पर, EU ने आपात बैठक बुलाई

डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड खरीद और 10-25% टैरिफ धमकी ने अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। यूरोप ने रविवार को आपात बैठक बुलाई।

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Ursula von der Leyen

यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन। (File Photo: X/@vonderleyen)

Greenland dispute: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड की खरीद को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव चरम पर पहुंच गया है। यूरोपीय संघ (EU) की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'अटलांटिक पार के संबंधों' के लिए घातक बताया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ट्रंप की धमकी के कुछ ही घंटों बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया 'X' पर चेतावनी देते हुए कहा कि टैरिफ लगाने से 'एक खतरनाक गिरावट (downward spiral)' शुरू होने का जोखिम है, जो दशकों पुराने अमेरिका-यूरोप संबंधों को नष्ट कर सकता है।

वॉन डेर लेयेन ने जोर देकर कहा, "यूरोप एकजुट, समन्वित और अपनी संप्रभुता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के मौलिक सिद्धांत हैं, और हम इन्हें किसी भी कीमत पर बनाए रखेंगे।"

आपातकालीन बैठक और कूटनीतिक प्रयास

उधर, फ्रांस24 की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूरोपीय संघ ने रविवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रस्तावित टैरिफ और अमेरिका के आक्रामक रुख के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा की जाएगी। वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड में हाल ही में यूरोपीय देशों के सैनिकों की तैनाती किसी भी देश के लिए खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि यह डेनमार्क के नेतृत्व में होने वाला एक पूर्व-निर्धारित सैन्य अभ्यास है। उन्होंने विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत पर जोर दिया और पिछले सप्ताह डेनमार्क और अमेरिका के बीच शुरू हुई बातचीत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

विवाद की जड़: ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व

आपको बता दें कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। जो विशाल खनिज संसाधनों और आर्कटिक में रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने ट्रंप के प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। वहां के लोगों के पास आत्मनिर्णय का अधिकार है।

डोनाल्ड ट्रंप की इस नई धमकी ने नाटो (NATO) सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर दी है और डेनमार्क तथा ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें रविवार को होने वाली यूरोपीय संघ की आपातकालीन बैठक पर टिकी हैं।

ग्रीनलैंड दो या टैरिफ झेलो: डोनाल्ड ट्रंप

स्थानीय समयानुसार शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादास्पद पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि यदि डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देश ग्रीनलैंड को अमेरिका को बेचने पर सहमत नहीं होते हैं, तो उन पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। ट्रंप की ओर से कहा गया है कि 1 फरवरी, 2026 से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से अमेरिका आने वाले सभी सामानों पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा। 1 जून, 2026 से यदि तब तक ग्रीनलैंड की "पूर्ण और कुल खरीद" का सौदा नहीं होता है, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। इस कदम को अमेरिकी राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि चीन और रूस की ग्रीनलैंड के प्रति बढ़ती दिलचस्पी अमेरिका के लिए खतरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुल्क तब तक लागू रहेगा जब तक समझौता नहीं हो जाता।