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India Middle East Europe Corridor : भारत और अरब देशों की बढ़ती नजदीकियां,अब इस नये कॉरिडोर के जरिये ग्लोबल मार्केट में पैठ बनाएगा इंडिया

locationनई दिल्लीPublished: Apr 03, 2024 04:10:56 pm

Submitted by:

M I Zahir

World News in Hindi : अमरीका ( America) और भारत ( India) के अरब देशों ( Arabic Countries ) के साथ रिश्ते मजबूत करने के मददेनजर कई देशों को मिला कर कई बिलियन अमरीकी डालर ( American Dollar) से इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॅारिडोर ( IMEC ) बनाया जा रहा है। यह कॉरिडोर बनने से भारत और अरब देशों के लिए ग्लोबल मार्केट के नये दरवाजे खुलेंगे। इसका एक सुखद पहलू यह भी है कि इससे भारत सहित कई देशों के करोड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।
 
 

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International News in Hindi : इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॅारिडोर ( India Middle East Europe Corridor) एक वैश्विक समूह है और इसके समझौते भारत से जुड़े हैं या भारत के हितों को प्रभावित कर रहे हैं। इसका पूर्वी कॉरिडोर भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ेगा। वहीं उत्तरी कॉरिडोर खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा।
आईएमईसी कॉरिडोर

आईएमईसी कॉरिडोर में एक बिजली केबल, एक हाइड्रोजन पाइपलाइन ( Hydrogen Pipeline) और एक हाई-स्पीड डेटा केबल ( Highdata speed Cable) भी शामिल होगी। जबकि रेलवे लाइन फ़ुजैरा बंदरगाह (यूएई) को सऊदी अरब (घुवाईफ़ात और हराद) और जॉर्डन (Jordan) के माध्यम से हाइफ़ा बंदरगाह (इज़राइल) से जोड़ेगा और यूरोप में ग्रीस में पीरियस बंदरगाह, दक्षिण इटली ( South Italy ) में मेसिना और फ्रांस ( France) में मार्सिले से जुड़ेगा।
3 से 8 बिलियन अमरीकी डालर के बीच लागत

प्रारंभिक अनुमानों से पता चलता है कि इनमें से प्रत्येक आईएमईसी मार्ग को विकसित करने में 3 बिलियन अमरीकी डालर से 8 बिलियन अमरीकी डालर के बीच लागत आ सकती है। इस प्रस्तावित आईएमईसी में रेलमार्ग, शिप-टू-रेल नेटवर्क और सड़क परिवहन मार्ग शामिल हैं, जो दो कॅारिडोर तक फैले होंगे, अर्थात पूर्वी कॅारिडोर – भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है और उत्तरी कॅारिडोर – खाड़ी को यूरोप से जोड़ता है। आईएमईसी कॉरिडोर में एक बिजली केबल, एक हाइड्रोजन पाइपलाइन और एक हाई-स्पीड डेटा केबल भी शामिल होगी।
सभी सभ्यताओं में एकीकरण

यह परियोजना महाद्वीपों और सभ्यताओं के बीच संबंधों और एकीकरण को मजबूत कर सकती है। यह क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अमरीका को प्रभाव बनाए रखने और पारंपरिक भागीदारों को आश्वस्त करने का एक रणनीतिक अवसर देता है।
कई देशों का नेटवर्क


इस एग्रीमेंट पर भारत, अमरीका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, यूरोपीय संघ, इटली, फ्रांस और जर्मनी ने हस्ताक्षर किए हैं। भारत: मुंद्रा (गुजरात), कांडला (गुजरात), और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (नवी मुंबई) इसके बंदरगाह हैं। वहीं मध्य पूर्व में संयुक्त अरब अमीरात में फ़ुजैरा, जेबेल अली और अबू धाबी के साथ-साथ सऊदी अरब में दम्मम और रास अल खैर बंदरगाह हैं।
रेल, सड़क और समुद्री मार्ग शामिल


रेलवे लाइन फ़ुजैरा बंदरगाह (यूएई) को सऊदी अरब (घुवाईफ़ात और हराद) और जॉर्डन के माध्यम से हाइफ़ा बंदरगाह (इज़राइल) से जोड़ेगी। इसी तरह इज़राइल में हाइफ़ा बंदरगाह,
यूरोप में ग्रीस में पीरियस बंदरगाह, दक्षिण इटली में मेसिना और फ्रांस में मार्सिले शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाला एक व्यापक परिवहन नेटवर्क बनाना है, जिसमें रेल, सड़क और समुद्री मार्ग शामिल हैं।
आईएमईसी का मकसद

इसका मकसद उद्देश्य परिवहन दक्षता बढ़ाना, लागत कम करना, आर्थिक एकता बढ़ाना, रोजगार पैदा करना और ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन कम करना है। इससे व्यापार और कनेक्टिविटी को सुविधाजनक बनाकर एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के एकीकरण में बदलाव आने की उम्मीद है। यह “मौजूदा समुद्री और सड़क परिवहन के पूरक के लिए एक विश्वसनीय और लागत प्रभावी सीमा-पार जहाज-से-रेल पारगमन नेटवर्क” देगा।

पारदर्शी बुनियादी ढांचा साझेदारी

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर, जी20 शिखर सम्मेलन, ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी), बैल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई), यूरेशियन क्षेत्र, एसईजेड विशेष आर्थिक क्षेत्र है। यह भारत के महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) परियोजना पर हस्ताक्षर किए गए, जो भारत के लिए महत्वपूर्ण भूराजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ रखता है। यह परियोजना वैश्विक अवसंरचना और निवेश साझेदारी (पीजीआईआई) का हिस्सा है। पीजीआईआई कई और मध्यम आय वाले देशों के विशाल बुनियादी ढांचे की जरूरतें पूरी करने के लिए एक मूल्य-संचालित, उच्च-प्रभाव और पारदर्शी बुनियादी ढांचा साझेदारी है।
भूराजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ


इसका भूराजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ चीन के BRI को विफल करना है। आईएमईसी को यूरेशियाई क्षेत्र में चीन के बैल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के संभावित प्रतिकार के रूप में देखा जाता है। यह खासकर अमरीका के साथ ऐतिहासिक रूप से मजबूत संबंधों वाले क्षेत्रों में चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करने का काम कर सकता है ।
पाकिस्तान के ओवरलैंड कनेक्टिविटी वीटो को तोड़ना

आईएमईसी का एक मकसद पश्चिम के साथ भारत की जमीनी कनेक्टिविटी पर अपने वीटो को तोड़ते हुए पाकिस्तान को दरकिनार करना है , जो अतीत में लगातार एक बाधा बना हुआ था।
इसका एक मकसद अरब प्रायद्वीप के साथ रणनीतिक जुड़ाव रखना भी है। यह कॉरिडोर स्थायी कनेक्टिविटी स्थापित कर और क्षेत्र के देशों के साथ राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों को बढ़ा कर अरब प्रायद्वीप के साथ भारत की रणनीतिक भागीदारी को गहरा करता है।
अंतर-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और शांति को बढ़ावा देना

आईएमईसी में अंतर-क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की क्षमता है और यह अरब प्रायद्वीप में राजनीतिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है। यह क्षेत्र में “शांति के लिए बुनियादी ढाँचा” बनने की संभावना रखता है।
अफ़्रीका में भारत की रणनीतिक भूमिका

ट्रांस-अफ्रीकी कॉरिडोर विकसित करने की अमरीका और यूरोपीय संघ की योजना के अनुरूप इस कॉरिडोर गलियारे के मॉडल को अफ्रीका तक बढ़ाया जा सकता है। यह अफ्रीका के साथ अपना जुड़ाव मजबूत करने और इसके बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान करने के भारत के इरादे दर्शाता है।
आर्थिक फायदा : उन्नत व्यापार अवसर


आईएमईसी प्रमुख क्षेत्रों के साथ अपनी व्यापार कनेक्टिविटी बढ़ाकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत के लिए एक परिवर्तनकारी अवसर देता है। यह मार्ग पारगमन का समय काफी कम कर सकता है, जिससे स्वेज नहर समुद्री मार्ग की तुलना में यूरोप के साथ व्यापार 40% तेज हो जाएगी।
प्रेरित औद्योगिक विकास

यह कॉरिडोर माल की निर्बाध आवाजाही के लिए एक कुशल परिवहन नेटवर्क तैयार करेगा। इससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और खासकर कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में कंपनियों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में आसानी होगी।

रोज़गार मिलेगा


इस कॉरिडोर के कारण जैसे-जैसे बेहतर कनेक्टिविटी के कारण आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा, सभी क्षेत्रों में नौकरी के अवसरों में वृद्धि होगी। व्यापार, बुनियादी ढांचे और संबद्ध उद्योगों में वृद्धि के लिए रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुशल और अकुशल श्रम की आवश्यकता होगी।

ऊर्जा सुरक्षा और संसाधन पहुंच


यह कॉरिडोर विशेष रूप से मध्य पूर्व से सुरक्षित ऊर्जा और संसाधन आपूर्ति की सुविधा दे सकता है। इन संसाधनों तक विश्वसनीय पहुंच भारत के ऊर्जा क्षेत्र को स्थिर करेगी और इसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था को समर्थन देगी।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों को सुविधा देना

इस कॉरिडोर के मार्ग पर एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) विकसित करने के लिए रणनीतिक रूप से लाभ उठाया जा सकता है। एसईजेड विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकते हैं और विनिर्माण को बढ़ावा दे सकते हैं और इन निर्दिष्ट क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति दे सकते हैं।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) की चुनौतियाँ


आईएमईसी की कई चुनौतियां हैं। इनमें रसद और कनेक्टिविटी मुद्दे हैं। इसमें कई देशों तक फैले रेल, सड़क और समुद्री मार्गों को शामिल करते हुए एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर विकसित करने के लिए हितधारकों के बीच जटिल लॉजिस्टिक योजना और समन्वय की आवश्यकता है। इनमें सबसे व्यवहार्य और लागत प्रभावी मार्गों का चयन करना, रेल और सड़क कनेक्शन की व्यवहार्यता का आकलन करना और इष्टतम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौतियां हैं।
अनेक देशों के बीच समन्वय


इस अंतर-महाद्वीपीय कॉरिडोर को साकार करने में विविध हितों, कानूनी प्रणालियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं वाले कई देशों के बीच प्रयासों, नीतियों और विनियमों का समन्वय करना एक बड़ी चुनौती है।
संभावित विरोध और प्रतिस्पर्धा


मौजूदा परिवहन मार्गों, विशेष रूप से मिस्र की स्वेज़ नहर का विरोध या प्रतिस्पर्धा से यातायात और राजस्व में कमी देखी जा सकती है, चुनौतियाँ और राजनयिक बाधाएँ पैदा हो सकती हैं।
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