
ईरान में बेचैन और बदहाल नागरिक। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Emergency: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के खतरों और ईरान की आंतरिक अशांति के बीच भारत सरकार की ओर से तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 14 जनवरी 2026 को एक अपडेटेड एडवाइजरी जारी (Indian Embassy Tehran Advisory) करने से ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों (Indians in Iran Safety) के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। उन्हें तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी गई है। इस फैसले से न केवल वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच होने वाले करोड़ों के कारोबार पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। भारतीय दूतावास (Indian Embassy Tehran) की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ईरान में मौजूद छात्र, तीर्थयात्री , कारोबारी और पर्यटक जल्द से जल्द उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या अन्य साधनों के जरिए स्वदेश लौट आएं। कूटनीतिक हलकों में इस एडवाइजरी को युद्ध की पूर्व आहट के रूप में देखा जा रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, ईरान में लगभग 5,000 से 8,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो वहां के विश्वविद्यालयों में चिकित्सा और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा, ईरान के पवित्र स्थलों की यात्रा पर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्री और चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स से जुड़े पेशेवर भी वहां मौजूद हैं। मौजूदा हालात ने इन सभी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने व्यापारिक संबंध हैं। भारत के लिए ईरान न केवल ऊर्जा का स्रोत रहा है, बल्कि मध्य एशिया तक पहुंचने का द्वार भी है।
निर्यात (Export): भारत से ईरान को मुख्य रूप से चावल (बासमती), चाय, चीनी, दवाइयां (Pharmaceuticals), और मशीनरी निर्यात की जाती है। भारत सालाना करीब 1.5 से 2 बिलियन डॉलर का सामान ईरान भेजता है।
आयात (Import): ईरान से भारत मुख्य रूप से कच्चे तेल के उत्पाद, ड्राई फ्रूट्स (बादाम, पिस्ता), केसर, और कुछ खास रसायनों का आयात करता है। चाबहार पोर्ट के जरिए होने वाला ट्रांजिट ट्रेड भी इस तनाव से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
भारत में ईरानी संस्कृति और साहित्य का गहरा प्रभाव रहा है। 'ईरान सोसाइटी' जैसे संस्थान दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करते हैं। उर्दू और फारसी के प्रसिद्ध साहित्यकार अखलाक आहन जैसे विद्वानों ने हमेशा दोनों देशों के रिश्तों को साहित्य के जरिए जोड़ने की बात कही है। लेकिन वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता इन सांस्कृतिक आदान-प्रदानों पर भी ब्रेक लगा सकती है।
विदेश मंत्रालय (MEA): भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षित वापसी है और वे स्थिति पर 24 घंटे नजर रख रहे हैं। कारोबारी जगत: भारतीय निर्यातकों में डर का माहौल है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के मुताबिक, यदि तनाव लंबा चला तो करोड़ों रुपये का भुगतान फंस सकता है।
भारत सरकार अगले 48 घंटों में अतिरिक्त चार्टर्ड फ्लाइट्स का इंतजाम कर सकती है। साथ ही, चाबहार पोर्ट के संचालन को लेकर भारत और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत होने की संभावना है। अगर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई शुरू होती है, तो यह कूटनीतिक मिशन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
इस संकट का एक महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा सुरक्षा है। भले ही भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात कम कर दिया हो, लेकिन इस क्षेत्र में युद्ध होने से वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर भारत की आम जनता की जेब (पेट्रोल-डीजल के दाम पर ) पड़ेगा।
Updated on:
14 Jan 2026 05:47 pm
Published on:
14 Jan 2026 05:47 pm
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
US Israel Iran War
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
